संवाद सहयोगी, फाजिल्का

ईजी डे से डीसी डा. बसंत गर्ग के कपड़े चोरी होने पर पुलिस द्वारा शोरूम के स्टोर कीपर के साथ मैनेजर पर पर्चा दर्ज करने पर शहर में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली। ज्यादातर लोग व विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों नेपुलिस कार्रवाई पर हैरानी व विरोध प्रकट करते कहा कि आम आदमी के वाहन, नकदी व घरों में सामान चोरी होने पर भी पुलिस पर्चा दर्ज करने में आनाकानी करती है लेकिन डीसी के कपड़े चोरी होने पर न केवल पर्चा दर्ज कर लिया जाता है बल्कि दोनों जिम्मेवार लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड ले लिया जाता है।

लोगों का सवाल था कि अगर कल को किसी प्रशासनिक अधिकारी के कार्यालय से कोई वाहन चोरी हो जाए तो क्या पुलिस उक्त अधिकारी के खिलाफ पर्चा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लेगी। व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक गुलबद्धर ने कहा कि शहर में इतनी चोरियां व वाहन गायब हो रहे हैं, इस पर पुलिस हरकत में क्यों नहीं आती।

वहीं बार्डर एरिया विकास फ्रंट के प्रतिनिधि बलजिंदर सिंह का कहना था कि डीसी के कपड़े चोरी होने पर पुलिस बेशक मामला दर्ज करे लेकिन आम आदमी व किसानों के वाहन व ट्रांसफार्मर चोरी होने पर शिकायत दर्ज करवाने में पीड़ितों की जूतियां क्यों घिसवाई जाती हैं।

वहीं, मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी राजपाल गुंबर ने कहा कि ईजी डे के शोरूम से डीसी के कपड़े चोरी होने पर मैनेजर पर पर्चा दर्ज करना गलत है।

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मैनेजर भी जिम्मेदार : एसएसपी

इस बारे में जिला पुलिस प्रमुख अशोक बाठ ने गार्ड के साथ मैनेजर पर पर्चा दर्ज करने को सही ठहराते कहा कि चूंकि मैनेजर शोरूम का इंचार्ज है, इसलिए उसकी भी बराबर की जिम्मेवारी बनती थी। जब उनसे ये पूछा गया कि क्या किसी सरकारी कार्यालय में किसी का वाहन चोरी होने पर भी पुलिस उक्त कार्यालय के प्रमुख या अधिकारी पर पर्चा दर्ज करेगी तो एसएसपी का कहना था कि अगर उक्त अधिकारी की जिम्मेवारी बनती पाई गई तो मामला जरूर दर्ज किया जाएगा।

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