अमृत सचदेवा, फाजिल्का

पर्यावरण संरक्षण के नियमों की अनदेखी करने के खिलाफ दायर याचिका के चलते फाजिल्का में सूख चुकी बाधा झील के किनारे कालोनी काटने की पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथारिटी (पुडा) की उम्मीदों को झटका लगा है। मामला हाईकोर्ट में जाने के चलते लोगों द्वारा उक्त कालोनी में प्लाट की बोली में शामिल होने के लिए जमा करवाए करीब साढ़े छह करोड़ रुपये भी फंस गए हैं।

बता दें कि पुडा ने फाजिल्का में सूख चुकी बाधा झील के किनारे पांच एकड़ भूमि में कालोनी काटने की घोषणा की थी। साथ ही इस संबंधी मुनादी करवाकर व इश्तहार जारी करवा लोगों से बोली में शामिल होने के लिए रुपये भी जमा करवाए थे। सैकड़ों लोगों ने कालोनी में प्लाट हासिल करने के लिए करीब साढ़े छह करोड़ रुपये जमा करवाए हैं। लेकिन इससे टूरिस्ट प्लेस व पर्यावरण संरक्षण के तहत कालोनी के कारण बाधा झील बचाने के प्रयास समाप्त होने की आशंका के चलते स्थानीय निवासी सिविल इंजीनियर नवदीप असीजा ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर कालोनी निर्माण रोकने की गुहार लगाई थी। याचिका में असीजा ने कहा कि पुडा ने कालोनी काटने से पहले पंजाब स्टेट साइंस एंड टेक्नोलोजी काउंसिल, पंजाब फारेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट एवं पंजाब प्रदूषण नियंत्रण विभाग से सहमती हासिल नहीं की। इंजीनियर असीजा ने याचिका में इस बात का हवाला भी दिया था कि पंजाब स्टेट साइंस एंड टेक्नोलोजी काउंसिल ने उक्त जगह पर पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पंजाब के 32 वेटलैंड में शामिल फाजिल्का बाधा झील को बचाने की सिफारिश की हुई है। इस पर हाईकोर्ट ने तीनों विभागों को तलब किया है। 17 जनवरी को पंजाब स्टेट साइंस एंड टेक्नोलोजी काउंसिल ने तो अपना वकील भेज जवाब दे दिया, जबकि अन्य दो विभाग पेश नहीं हुए। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई व जस्टिस मोहित ग्रोवर की बैंच ने अगली सुनवाई 21 मार्च को मुकर्रर की है।

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