नरेश कामरा, फाजिल्का

जिला सुविधा केंद्र ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की असुविधा व आर्थिक शोषण का केंद्र बन गया है। यहां लाइसेंस बनवाने वालों को दोगुनी मेडिकल जांच फीस भरनी पड़ रही है। एक तो बिना किसी जरूरत के मेडिकल सरकारी अस्पताल से करवाने के लिए बाध्य किया जाता है, वहीं अस्पताल की फीस के बाद सुविधा केंद्र पर भी मेडिकल फीस की वसूली की जा रही है। इससे जहां लोगों को एक ही छत के नीचे सुविधा नहीं मिल रही, वहीं दोगुनी फीस लेकर उनका आर्थिक शोषण भी किया जा रहा है।

जरूरी नहीं सरकारी अस्पताल से जांच : एएसटीसी

स्टेट ट्रांसपोर्ट एक्ट के अनुसार लाइसेंस बनवाने के लिए देश के किसी भी एमबीबीएस डाक्टर और यहां तक कि आयुर्वेदिक डाक्टर के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के आधार पर लाइसेंस बनवा सकता है। लेकिन फाजिल्का में सुविधा केंद्र द्वारा केवल सरकारी अस्पताल के डाक्टर का सर्टिफिकेट मांगा जाता है, जबकि राज्य के किसी अन्य जिले में यह बाध्यता नहीं है। एडीशनल स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर हरमेल सिंह ने इसकी पुष्टि की है।

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दोगुनी फीस पर कोई जवाब नहीं

फाजिल्का: सुविधा केंद्र में डाक्टर चेकअप के नाम पर वसूली जा रही 35 रुपए फीस और सरकारी अस्पताल से मेडिकल की बाध्यता बारे जिला ट्रांसपोर्ट आफिसर बलवीर सिंह राणा ने कहा कि स्टेट ट्रांसपोर्ट एक्ट के अनुसार वह किसी भी एमबीबीएस, बीएएमएस डाक्टर का सर्टिफिकेट स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन दोगुनी फीस वसूले जाने बारे पूछने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में तो सुविधा केंद्र के अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं। वहीं सहायक सुविधा केंद्र आफिसर प्रदीप गक्खड़ ने कहा कि जगह की कमी और जांच उपकरण न होने के चलते सुविधा केंद्र में डाक्टर की नियुक्ति नहीं है। डाक्टर चेकअप के नाम पर वसूली जा रही फीस के बारे में कहा कि यह शुरू से ली जा रही है। सरकारी अस्पताल में मेडिकल जांच करवाने पर अलग से ली जा रही 50 रुपए फीस के बारे में एसएमओ डा. एसपी गर्ग ने कहा कि यह फीस सरकारी अस्पताल के नियमानुसार ली जा रही है। उनका सुविधा केंद्र में ली जा रही फीस से कोई वास्ता नहीं है।

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