संस, अबोहर : अबोहर का सरकारी टीबी अस्पताल आठ साल से बिना डॉक्टर के ही चल रहा है। अस्पताल के आंकड़ों के हिसाब से हर महीने 30 से अधिक मरीज टीबी से पीड़ित इलाज के लिए यहां आते हैं। टीबी के मरीजों की जांच सरकारी अस्पताल के एमडी डॉ. युधिष्टर चौधरी ही करते हैं जो हार्ट स्पेशलिस्ट हैं। उनके पास दूसरे मरीजों की भी कतारें लगी रहती हैं। डॉ. युधिष्टर चौधरी बताते हैं उनके पास रोजाना 10 से 15 मरीज टीबी से संबंधित आते हैं। दूसरे मरीजों के साथ टीबी के मरीजों को देखने में दिक्कत तो पेश आती है लेकिन मजबूरी में उनको टीबी के मरीजों को उनके साथ ही देखना पड़ता है। टीबी अस्पताल में डॉ. जीएस कालड़ा आठ साल पहले सेवानिवृत हो गए, जिसके बाद से यहां किसी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई जबकि टीबी अस्पताल में दो पद स्पेशलिस्ट के स्वीकृत हैं। डॉ. चौधरी के अनुसार टीबी से आशंकित मरीज के कई तरह के टेस्ट करवाने पड़ते हैं जो कि सरकारी अस्पताल में फ्री होते हैं, जिसके बाद ही टीबी रोग का पता चल पाता है। उन्होंने बताया कि टीबी के रोगी का इलाज 6 से 9 महीने तक चलता है व रोगी को रोजाना दवा खानी होती है जिसे डाट्स कहते हैं व इसकी दवा भी सरकारी अस्पताल में फ्री मिलती है। विभाग को लिखेंगे एसएमओ

सरकारी अस्पताल की एसएमओ डॉ. अमिता चौधरी ने बताया कि टीबी मरीजों की जांच के लिए डॉ. चौधरी की ड्यूटी लगी हुई है। उन्होंने बताया डॉक्टर की नियुक्ति के लिए वह स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर जानकारी देंगे। जाखड़ से करेंगे मांग

समाजसेवी विपन शर्मा, श्री बाला जी मानव सेवा समिति के प्रधान रजत लूथरा, श्री बालाजी समाजसेवा संघ के प्रधान गगन मल्होत्रा, नर सेवा नारायण सेवा समिति के प्रधान राजू चराया, समाज सुधार सभा के प्रधान राजेश गुप्ता ने कहा कि समस्या को लेकर कांग्रेस प्रभारी संदीप जाखड़ से मिलेंगे। डॉक्टरों की कमी दूर करने की मांग की जाएगी।

Posted By: Jagran

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