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ये तो हद हो गई! पंजाब में दशहरे पर नशे का पुतला बनाकर जलाना ही भूल गई कमेटी

Published: Tue, 20 Oct 2026 10:46 PM (IST)

अबोहर में दशहरे पर नशे के खिलाफ संदेश देने वाला पुतला जलाना भूल गए, जिससे यह प्रयास अधूरा रह गया। ...और पढ़ें

दशहरे पर नशे का पुतला जलाना ही भूल गई कमेटी, खड़े पुतले ने खोली तैयारियों की पोल।

दशहरे पर नशे का पुतला जलाना ही भूल गई कमेटी, खड़े पुतले ने खोली तैयारियों की पोल।

HighLights

  1. नशे के पुतले का दहन करना भूल गई कमेटी।

  2. दशहरे पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा में कमी।

  3. युवकों ने एक-दूसरे पर फेंके जले पटाखे।

संवाद सहयोगी, अबोहर। दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण के दहन के साथ समाज को नशे जैसी बुराई से दूर रहने का संदेश देने के उद्देश्य से दशहरा कमेटी की ओर से नशे का पुतला भी बनाया गया था।

लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कमेटी के सदस्य नशे के इस पुतले को जलाना ही भूल गए। पुतला मैदान में खड़ा ही रह गया और नशे के खिलाफ संदेश देने की तैयारी महज औपचारिकता बनकर रह गई।

दशहरा आयोजन के दौरान अव्यवस्थाएं भी देखने को मिलीं। पुतलों और आतिशबाजी के आसपास लोगों की आवाजाही बनी रही। पुलिस और कमेटी के सदस्य लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने में नाकाम नजर आए। इससे किसी भी समय अप्रिय हादसा होने का खतरा बना रहा।

चले हुए पटाखे एक-दूसरे पर फेंकते रहे युवक

सबसे चिंताजनक स्थिति तब दिखाई दी, जब कुछ युवक जले हुए पटाखे और आतिशबाजी एक-दूसरे की तरफ फेंकते रहे। ऐसी लापरवाही से किसी के झुलसने या गंभीर चोट लगने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ को नियंत्रित करने के इंतजामों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन आयोजन में नशे के पुतले का दहन भूल जाना और आतिशबाजी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रहना कमेटी की तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान पुतलों के दहन की पूरी योजना, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।