मोहित गिल्होत्रा, फाजिल्का

मेरी शादी हुए अभी पूरे दो महीने भी नहीं हुए, शादी से पहले से लेकर शादी के बाद की रस्मों को निभाने और अपने पिया के घर में ससुराल वालों के दिल में जगह बनाने के अब तक के सफर में करवाचौथ व्रत का जो मुकाम आया है, उसने सही मायनों में मुझे सुहागिन होने का अहसास करवाया है। यह कहना है फाजिल्का के माधवन नगरी निवासी सौरभ चावला की पत्नी ज्योति चावला का।

ज्योति ने बताया कि अपने परिवार में अपनी मां व परिवार की अन्य महिलाओं को व्रत रखते हुए देखती थी। लेकिन तब केवल उनका सजना संवरना और व्रत से जुड़ी रस्में निभाना ही नजर आता था, लेकिन आज जब खुद अपने पति की लंबी उम्र की कामना से सारा दिन भूखे रहकर अपने वैवाहिक जीवन के भविष्य के बारे में सोचा, तो पता चला कि इस व्रत की क्या महानता है। इस व्रत ने मुझे पूर्ण रूप से सुहागिन होने का अहसास करवाया है। वहीं, गांव झोक निवासी राकेश दहूजा की नवविवाहित पत्नी शिल्पा दहूजा ने कहा कि शादी के बाद पहले करवाचौथ व्रत का जो महत्व सुहागिन के जीवन में होता है, वह किसी और पर्व का नहीं होता। पति ने भी व्रत में उसका साथ दिया और उसके साथ सरघी के बाद रात को खाना खाया तो अहसास हुआ कि वास्तव में पति-पत्नी गृहस्थी के दो पहिए हैं जो एक दूसरे के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। वहीं, सुनील कुमार की पत्नी मीना ने कहा कि शादी पर दुल्हन बनने के बाद सजने संवरने का दूसरा सबसे बड़ा मौका करवाचौथ के रूप में आया है। उसने अपनी पांच माह पहले हुई शादी के मौके एक युवती से पत्नी बनने का जो अहसास प्राप्त किया था, वह करवाचौथ व्रत मौके फिर से ताजा हो गया है। वहीं आशु की पत्नी काजल ने कहा कि वह करवाचौथ का व्रत पूरे पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मनाएंगी।

Posted By: Jagran

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