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पूर्व पीएम स्व. इंदिरा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी जी की के जन्मदिवस पर स्थानीय मंडी नंबर एक के कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस वर्करों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

By JagranEdited By: Published: Wed, 20 Nov 2019 12:35 AM (IST)Updated: Wed, 20 Nov 2019 06:13 AM (IST)
पूर्व पीएम स्व. इंदिरा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित
पूर्व पीएम स्व. इंदिरा गांधी को श्रद्धासुमन अर्पित
संस, लुधियाना : एसएस जैन स्थानक सिविल लाइंस में जारी धर्म सभा में ओजस्वी वक्ता गुरुदेव अचल मुनि ठाणा-5 के सान्निध्य में महासाध्वी श्री ज्योति प्रभा म. की सुशिष्या साध्वी श्री सुगंध म. ने कहा कि संसार में मनुष्य दुखी क्यों है? लोग कहते हैं मै बड़ा दुखी हूं। घर का मकान नहीं है, तो दुखी। दुकान पर काम नहीं है तो दुखी, शादी नहीं हुई, तो दुखी। शादी हो गई तो भी दुखी। प्रभु महावीर ने कहा कि ज्ञानी सोने और अज्ञानी नींद में सोने के समान होता है। उन्होंने कहा कि सही दुख तो अज्ञान का है। ज्ञान का प्रकाश होते ही चारों ओर सुख का साम्राज्य स्थापित हो जाएगा। गीता में भी श्री कृष्ण भगवान ने कहा है कि ज्ञान से पवित्र चीज कोई ओर नहीं है। ज्ञानी सोने के समान होता है। व अज्ञानी लोहे से समान होता है। दोनों को अगर कीचड़ में डाला जाए तो लोहे पर ही जंग लगेगा, सोने पर नहीं। ज्ञानी हमेशा सुलझ कर चलेगा व अज्ञानी हमेशा उलझ कर चलेगा।
 ज्ञान धागे के समान
 प्रभु महावीर ने कहा कि ज्ञान एक धागे के समान है। जैसे दो सुइयां है, एक धागे वाली एक बिना धागे वाली। याद रखना बिना धागे वाली सूई ही गुम होगी। धागे वाली सूई पहली बात तो गुम नहीं होगी। अगर हो भी गई तो अतिशीघ्र मिल भी जाएगी। जब तक अज्ञान रहेगा, तब तक इंसान दुखी रहेगा। ज्ञान पैदा होते ही उलझी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान कैसे पैदा होता है। ठोकर खाने से भी ज्ञान पैदा हो जाता है। अरे कांच ठोकर खाने से टूट जाता है, पर इंसान ठोकर खाने से बन जाता है।
 अच्छी संगत से मिलता है ज्ञान
 उन्होंने कहा कि अच्छी संगत से भी ज्ञान पैदा होता है। ज्ञानी कौन होता है। जो प्राप्त चीज का दुरुपयोग नहीं करता। ज्ञान एक दीपक के समान होता है। जो स्वयं जलकर अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है। मक्खन में फंसे बाल को निकालना सहज होता है। परंतु सूखे हुए गोबर के कंडे में फंसे हुए बाल को निकालना बड़ा कठिन है। ज्ञानी के शरीर में रहने वाला जीव मक्खन के गोले में फंसे बाल जैसा है। वह मृत्यु के समय सहजता में प्राण छोड़ देता है। लेकिन अज्ञानी मृत्यु के समय रोता है। क्योंकि उसके प्राण वासना में अटक जाते है और यही वासना उसे फिर परिवार में खींच लाती है।

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