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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 18, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पश्चिमी सभ्यता छोड़े हिंदू संस्कृति अपनाएं : सिक्का

By JagranEdited By:
Published: Sun, 18 Mar 2018 02:58 AM (IST)

अबोहर : धर्म नगरी स्थित एचएस पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शहीद ऊधम ¨सह क्लब अबोहर ने विक्रमी संवत के आगमन पर 'नववर्ष 2075' कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

पश्चिमी सभ्यता छोड़े हिंदू संस्कृति अपनाएं : सिक्का
पश्चिमी सभ्यता छोड़े हिंदू संस्कृति अपनाएं : सिक्का

जागरण संवाददाता, अबोहर : धर्म नगरी स्थित एचएस पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शहीद ऊधम ¨सह क्लब अबोहर ने विक्रमी संवत के आगमन पर 'नववर्ष 2075' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य मेहमान सेवानिवृत्त उपमंडल अधिकारी बीएल सिक्का थे, विशेष मेहमान क्लब के चेयरमैन एडवोकेट देसराज कंबोज, आयुर्वेद एवं युनानी मंडल अबोहर के अध्यक्ष डॉ. परमानंद धूडि़या, जिला स्काउट कमिश्नर दर्शन लाल चुघ थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल के ¨प्रसिपल दौलत चलाना ने की।

सिक्का ने कहा कि भारतीय कैलेंडर सबसे प्राचीन है। भारत के एक सम्राट महाराज विक्रमादित्य ने 2075 वर्ष पूर्व विक्रम संवत भारतीय कैलेंडर की स्थापना की थी। जब हम अपने धार्मिक अनुष्ठानों मांगलिक कामकाज, व्रत-उपवासों, मुंडन, विवाह आदि को भारतीय पंचांग के हिसाब पर ही निर्धारित करते हैं तो फिर जीवन के हर वर्ष के सबसे पहले दिन को क्यों नहीं। उन्होंने विक्रमी सवंत के आगमन की विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और पश्चिमी सभ्यता न अपनाने व हिंदू संस्कृति को अपनाने के लिए प्रेरित किया। एडवोकेट कंबोज ने कहा पिछले दो हजार वर्षो में अनेक देशी और विदेशी राजाओं ने अपनी साम्राज्यवादी आकांक्षाओं की तुष्टि करने तथा इस देश को राजनीतिक दृष्टि से पराधीन बनाने के प्रयोजन से अनेक संवतों को चलाया, लेकिन भारत की सांस्कृतिक पहचान केवल विक्रमी संवत से ही जुड़ी रही। यह भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के शौर्य का प्रतीक है।