संवाद सहयोगी, अबोहर : प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देने और लोगों को आकर्षित करने के लिए सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाया जा रहा है। फाजिल्का अपर प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट बनाने में राज्य भर में नंबर वन पर है।

जिला स्मार्ट स्कूल कमेटी के प्रमुख व धर्मपुरा के प्रिसिपल मोहन लाल कुदाल ने बताया कि शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार की प्रेरणा से अध्यापक अपने बलबूते पर सेल्फ मेड स्मार्ट स्कूल बनाने में लगे हैं। इस अभियान से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 230 अपर प्राइमरी स्कूल हैं, जिसमें से जिला शिक्षा अधिकारी पवन कुमार की अगुआई में अध्यापकों व टीम के सहयोग से 217 स्कूल स्मार्ट स्कूल बन चुके हैं। उन्होंने बताया इस तरह राज्य में अपर प्राइमरी स्कूलों में फाजिल्का जिला पहले स्थान पर है। उन्होंने बताया कि इसी तरह जिले में 467 सरकारी प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें 354 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल में बदला जा चुका है। इस तरह जिला प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने में राज्य में 7वें स्थान पर है। प्रिसिपल मोहन लाल ने बताया कि अबोहर मेन रोड पर जिले में 15 प्राइमरी स्कूल हैं, जो सभी स्मार्ट स्कूल बन चुके हैं, जबकि जिले में अपर प्राइमरी मेन रोड पर 20 स्कूल हैं। यह सभी स्मार्ट स्कूल बनाए गए हैं। जिले में 60 साल से पुराने स्कूलों की संख्या 35 हैं, जिसमें से 28 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल में बदला जा चुका है। शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार द्वारा 60 साल से पुराने स्कूलों को पुरानी विरासत के रूप में संभालने के लिए विशेष प्रयास शुरू किए गए हैं।

इन पांच पैरामीटर की जरूरत

प्रिसिपल मोहन लाल कुदाल ने बताया कि सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए शिक्षा सचिव ने पांच पैरामीटर बताए हैं। इनको पूरा करने पर स्कूल को स्मार्ट स्कूल का दर्जा दे दिया जाता है।

1. ग्रीन बोर्ड

2. कलर कोड

3. स्मार्ट यूनिफार्म विद टाई बेल्ट

4. बाला वर्क

5. स्मार्ट क्लास रूम

अध्यापकों को किया जा रहा प्रेरित : प्रिंसिपल मोहन

प्रिसिपल मोहन लाल ने बताया कि जिले में बाकी बचे स्कूलों को स्मार्ट बनाने के प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए डीईओ पवन कुमार की अगुआई में स्कूल हेड व अध्यापकों को टीम को प्रेरित किया जा रहा है, जिससे अध्यापक अपने स्तर पर स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के प्रयास में लगे हैं।

Posted By: Jagran

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