संवाद सूत्र, फाजिल्का : फाजिल्का जिले में एक बार फिर से डेंगू पांव पसार रहा है। अब तक 15 केस सामने आ चुके हैं, जबकि डेंगू के लारवे के मिलने का क्रम जारी है। 15 मरीजों का आंकड़ा सरकारी तौर पर है, जबकि कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो घर पर ही डेंगू होने संबंधी पता न होने पर ईलाज ले रहे हैं।

सिविल सर्जन डा. दविद्र ढांडा ने बताया कि डेंगू बुखार एडिज ऐजिपटी नामक मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर ठहरे पानी में पैदा होता है और दिन समय पर काटता है। डेंगू टेस्ट और इलाज जिला अस्पताल फाजिल्का में मुफ्त किया जाता है। उन्होंने बताया कि डेंगू की रोकथाम के लिए फाजिल्का शहर के प्राइवेट लैब संचालकों के साथ बैठक भी की जा चुकी है। प्राईवेट लैब संचालकों को बताया गया कि लैब में कोई भी बुखार का केस या डेंगू का संदिग्ध मरीज आए तो उनका अलाइजा टेस्ट करवाना यकीनी बनाया जाए। उधर नगर कौंसिल द्वारा भी लगातार शहर में फोगिग करवाकर डेंगू की रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा सेहत कर्मचारियों द्वारा घरों में जाकर दवाओं का छिड़काव भी किया जा रहा है।

आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं: पुरी संवाद सूत्र, फाजिल्का : इन्नरव्हील क्लब द्वारा फाजिल्का में चेयरमैन आफिशियल विजिट का आयोजन किया गया। क्लब की डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन नीता पुरी ने सिरसा से विशेष रूप से फाजिल्का आकर क्लब द्वारा करवाई जा रही गतिविधियों का जायजा लिया।

इस मौके नीता पुरी ने कहा कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं, तो समाजसेवा में भी पीछे कैसे हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि इन्नरव्हील क्लब की विभिन्न ब्रांचों ने अपने सेवा कार्यों से साबित कर दिखाया है कि महिलाएं समाजसेवा के क्षेत्र में भी किसी से कम नहीं हैं। इस मौके पर क्लब की अध्यक्ष सुमन धवन के अलावा सचिव प्रिया खुंगर, पूर्व अध्यक्ष स्नेह शारदा, विपिन कामरा, नीरा भठेजा, सुमन सिंह, ललिता आहूजा, चंचल कामरा, मीनू नागपाल, अंजू कामरा, रिपी भूसरी, अंजू भठेजा, अंजलि सचदेवा, नीरज दूमड़ा, पायल खुंगर, सिमरन वधवा, किरण मदान, ईशा कामरा, मीनू गोयल, सविता भारती, डा. रूपाली ग्रोवर, राधिका, अनिघा, मुस्कान व अन्य सदस्याएं मौजूद रहीं। इस दौरान बठिडा में इन्नरव्हील क्लब की अध्यक्ष रह चुकी व वर्तमान में फाजिल्का रह रहीं और क्लब से जुड़ी ललिता आहूजा ने नृत्य प्रस्तुति से संदेश दिया कि खुशी हमेशा आंतरिक होती है और उसके इजहार का गीत, संगीत, नृत्य बेहतर जरिया है।

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