धरमिदर सिंह, खेड़ी नौध सिंह (फतेहगढ़ साहिब)

संगीत की दुनिया में अमर नूरी का सरदूल बेशक सदा के लिए अमर हो गया। लेकिन गायकी के इस सिकंदर के सुर रहती दुनिया तक गूंजते रहेंगे। इस निधन के बाद पंजाबी इंडस्ट्री को पड़ने वाले घाटे पर कोई कह रहा था कि संगीत की यूनिवर्सिटी सदा के लिए बंद हो गई तो किसी ने सरदूल को संगीत की लाइब्रेरी बताया। इस गायक से प्रेम को लफ्जों में बयां करते हुए प्रशंसकों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

दुनिया भर में नाम कमाने वाले सरदूल के जद्दी गांव खेड़ी नौध सिंह के सरपंच रमिदर सिंह रमला ने भी सरदूल से दोस्ती और इंसानियत को निभाते हुए अपनी जमीन में से दो कनाल जगह इस महान शख्सियत की कब्र बनाने के लिए छोड़ दी। जब सरदूल की कब्र खोदने के लिए कब्रिस्तान में जगह देखी जा रही थी तो पत्नी अमर नूरी ने भी अपनी अंतिम इच्छा जाहिर कर दी। नूरी बोलीं कि उनकी कब्र के साथ अभी से जगह छोड़ी जाए और मौत के बाद मेरी कब्र भी साथ ही बनाई जाए। पत्नी की इस अंतिम इच्छा को सरपंच ने पूरा किया और परिवार वालों को यहां तक कह दिया कि उनकी चार कनाल जमीन में से भविष्य में कोई जरूरत पड़ी तो वे इसे छोड़ देंगे। यही नहीं सरदूल की यादगार बनाने का फैसला लेते हुए जरूरत की सूरत में और जमीन खरीदकर देने का ऐलान भी कर दिया गया।

सरपंच रमला ने बताया कि सरदूल के निधन के बाद बुधवार की रात को कुछ कलाकार उनके पास आए थे। जिन्होंने इच्छा जताई थी कि वे सुरों के सरताज की कब्र को एक यादगार के तौर पर बनाना चाहते हैं। इसलिए कब्र का स्थान विशेष जगह पर रखा जाए तो बेहतर होगा। चूंकि, पुराने कब्रिस्तान में जगह कम होने के चलते सरदूल की कब्र खोदने में दिक्कत आ रही थी। इस कब्रिस्तान के साथ ही सरपंच की जमीन लगती है। सरपंच ने बिना कुछ सोचे समझे अपनी गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चलवाते हुए दो कनाल जमीन देने का ऐलान कर दिया। कुछ लोगों ने जमीन के बदले रकम देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे सरपंच ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरदूल उनके भी परिवार के सदस्य ही थे।