लोगो (स्वच्छ वातावरण के प्रहरी ) जागरण संवाददाता, फतेहगढ़ साहिब : वातावरण प्रदूषण को रोकने के लिए जिले के सफल किसान के तौर पर जाने जाते गांव बरौंगा जेर तहसील अमलोह के प्रगतिशील किसान पलविंदर ¨सह ने खेत में बीते 10 सालों से पराली को आग नहीं लगाई। पल¨वदर ¨सह ने पोस्ट ग्रेजुएशन और हायर डिप्लोमा इन को-आपरेटिव मैनेजमेंट किया हुआ है। 2008 से लेकर अब तक हैपी सीडर के साथ गेहूं की बिजाई कर रहा है। इन सालों के बीच पलविंदर ने कभी भी खेतों में पराली को आग नहीं लगाई। किसान के पास अपनी 5 एकड़ जमीन है और 15 एकड़ जमीन ठेके पर ली हुई है। इस तरह 20 एकड़ क्षेत्रफल में गेहूं-धान की फसल, आलू और सूरजमुखी फसलों की बिजाई करता आ रहा है। वहीं पलविंदर की आधुनिक तकनीत से खेतीबाड़ी करने का कृषि विभाग, कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना की तरफ से निरीक्षण भी किया जा चुका है। इसके अलावा कई खेती माहिर, विदेशी वैज्ञानिक खेत का दौरा कर चुके हैं।

मशीन के प्रेशर व्हीलर घंटे में करते हैं बिजाई

पलविन्दर ¨सह ने हैपी सीडर मशीन के पीछे प्रेशर व्हीलर लगवाया हुआ है, जिसके साथ मशीन की कार्यकुशलता में विस्तार हुआ है। पहले जहां एक एकड़ क्षेत्रफल की बिजाई करने के लिए 2 घंटे का समय लगता था, अब इस मशीन से 1 से डेढ़ घंटे में बिजाई हो जाती है।

जिले का पहला सफल किसान है पल¨वदर

कृषि विभाग के अनुसार पलविन्दर ¨सह जिले का पहला किसान है, जिसने कम्बाइन के पीछे स्टराय मैनेजमेंट सिस्टम लगवाया हुआ है। यह एसएमएस द्वारा पराली को खेतों में एक सार बिखेर देता है। इस तकनीक के साथ गेहूं में घास कम पैदा होती है, जिसके कारण कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। इसके अलावा जमीन के नीचे के पानी की बचत भी होती है। पलविन्दर ¨सह कृषि विभाग और पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना की तकनीक को खेतों में अपनाकर दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है।

2015 में इनोवेटिव राइस फार्मर का अवार्ड

सिंह ने 2006 में पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी, लुधियाना से खुंब की खेती संबंधित और साल 2009 में केंद्रीय बागवानी संस्था, लखनऊ से फल की संभाल का प्रशिक्षण हासिल किया और साल 2013 में डब¨लग फूड प्रोडक्शन विषय पर नई दिल्ली में हुई इंटरनेशनल कांफ्रेंस में पंजाब का प्रतिनिधित्व भी किया। साल 2013 में बेल्जियम के ब्रैसल•ा में बायो -रिफाइ¨नग तकनीक पर वर्कशाप में भाग लिया। साल 2015 में उसे हैदराबाद में इनोवेटिव राइस फार्मर का अवार्ड भी मिला है।

Posted By: Jagran