धरमिदर सिंह, फतेहगढ़ साहिब : खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य या किसी अन्य वर्ग में प्रतिभा से नाम कमाने वाली बेटियां अब केवल घर ही नहीं, गली-मोहल्ले व कस्बे की भी शान बनेंगी। ऐसी बेटियों के नाम पर फतेहगढ़ साहिब में गली-मोहल्लों और कस्बों के नाम रखे जाएंगे। यह फैसला डिप्टी कमिश्नर अमृत कौर गिल ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत लिया है। इसका लक्ष्य समाज में लड़का-लड़की में अंतर को लेकर लोगों की मानसिकता बदलना है। डीसी ने इस पर फौरन अमल करने के आदेश देते हुए विभिन्न विभागों से होनहार लड़कियों के नाम भी मांगे हैं। इस फैसले से होनहार लड़कियों का नाम रेवेन्यू रिकार्ड में भी गूंजेगा। डीसी ने यह फैसला वीरवार को जिला प्रबंधकीय कांप्लेक्स में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान तहत आयोजित बैठक के दौरान लिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लड़कियां हर क्षेत्र में अच्छा नाम कमा रही हैं और किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं। लेकिन फिर भी समाज में कुछ बुरी सोच वाले लोग लड़कों को लड़कियों से ज्यादा तरजीह देते हैं। इनकी सोच को बदलने के लिए होनहार लड़कियों के नाम पर गली-मोहल्लों के नाम रखने का फैसला लिया गया। उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों को हिदायत की कि जिले की उन सभी होनहार लड़कियों का विवरण दिया जाए जो राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शिक्षा, खेलों, सभ्याचारक गतिविधियों में जिले के नाम रोशन करने वाली छात्राओं की रिपोर्ट फोटो समेत सप्ताह में मांगी है। यही नहीं, डीसी ने नसीहत दी कि नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए घरों के बाहर घर की महिमा का नाम भी अंकित कराया जाए। बैठक में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की जिला अधिकारी सुमनदीप कौर, डीईओ (सेकेंडरी) परमजीत कौर सिद्धू, डीईओ (प्राइमरी) दिनेश कुमार, जिला बाल सुरक्षा अधिकारी हरभजन सिंह महमी भी मौजूद रहे। इन्हें मिलेगी प्रमुखता

जिले में अब तक जिन लड़कियों ने खेलों व शिक्षा में राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाम हासिल किया है, उनकी उपलब्धि के आधार पर लड़कियों के रिहायशी क्षेत्र में गली-मोहल्ले या फिर कस्बे का नाम रखा जा सकता है। बड़ी उपलब्धि पर स्कूल का नाम भी होनहार लड़की के नाम पर रखा जा सकता है। कोरोना संकट में अपनी ड्यूटी को बाखूबी निभाकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में जान की बाजी लगाने वाली आशा वर्करों, स्टाफ नर्सों और अन्य महिला कर्मियों को भी इस श्रेणी में शामिल किया जा सकता है।

धऱमिदर सिंह

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