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राजनीति छोड़ संतों की सेवा में जाने पर विचार कर रहीं नवजोत कौर सिद्धू; संत रामपाल के आश्रम में दिया बयान

Published: Mon, 02 Mar 2026 05:12 PM (IST)

खमाणों में संत रामपाल आश्रम पहुंचीं नवजोत कौर सिद्धू ने राजनीति छोड़ संतों की सेवा में जाने का विचार व्यक्त ...और पढ़ें

संत रामपाल आश्रम में पहुंची डॉ. नवजोत कौर।

संत रामपाल आश्रम में पहुंची डॉ. नवजोत कौर।

HighLights

  1. नवजोत कौर सिद्धू राजनीति छोड़ संतों की सेवा में।

  2. आध्यात्मिक मार्ग पर ध्यान केंद्रित करने की इच्छा जताई।

  3. पति संग शरीरदान का संकल्प लिया नवजोत कौर ने।

दीपक सूद, फतेहगढ़ साहिब। पूर्व क्रिकेटर व राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू राजनीति छोड़कर संतों की सेवा में शामिल होने की बात कही है। यह बात उन्होंने खमाणों में संत रामपाल के आश्रम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम में सात लड़कियों के दहेज रहित विवाह पर उन्हें बधाई देते हुए नवजोत कौर सिद्धू ने सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को सराहनीय बताया।

डॉ. नवजोत ने कहा कि उनका अपना विवाह भी बिना दहेज और सादगी से हुआ था। उनके बच्चों के विवाह भी इसी परंपरा के अनुसार संपन्न हुए हैं। उन्होंने कहा कि समाज में दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए ऐसे प्रयास बेहद जरूरी हैं।

नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि उनके अनुसार कन्यादान सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने कहा कि राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही और कई लोग अपनी मूल पहचान और सिद्धांतों को भूल चुके हैं। ऐसे में वह भक्ति और संतों की संगति में समय बिताने पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

चार वर्षों तक संतों की संगति में रह चुकीं

उन्होंने बताया कि बचपन में वह तीन-चार वर्षों तक संतों की संगति में रहीं, जिससे उन्हें जीवन में सेवा और समर्पण की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और राजनीतिक जीवन में भी उन्होंने संतों से मिली प्रेरणा के आधार पर ही कार्य किया।

कैंसर से जंग जीतने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक नया जीवन है। उन्होंने इसे ईश्वर की कृपा बताया और कहा कि अब वह आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना चाहती हैं।

नवजोत सिद्धू के साथ मिल शरीरदान का संकप्ल ले चुकीं

इस अवसर पर उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पति नवजोत सिंह सिद्धू के साथ मिलकर अपने पूरे शरीर का दान करने का संकल्प लिया है, ताकि मृत्यु के बाद उनके अंग जरूरतमंद लोगों के काम आ सकें।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह सेवा और भक्ति पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहतीं।