जागरण संवाददाता, फतेहगढ़ साहिब : दूध और दूध से बनने वाले पदार्थों में मिलावटखोरी एक ¨चता का विषय बना हुआ है। मिलावट के कारण कैंसर और कई अन्य रोग पैदा हो रहे हैं। मिलावटखोरी एक्ट में कुछ खामियों के कारण दिक्कतें पैदा हो रही है। ऐसे में शीघ्र ही फूड सेफ्टी एक्ट में संशोधन किया जाएगा। फूड सेफ्टी आफ इंडिया मुताबिक देश में 68.08 प्रतिशत दूध से बने पदार्थ जहरीले और 87 प्रतिशत मिलावटी हैं। जोकि ¨चता का विषय है। देश में पशु पालकों की संख्या में पिछले 25 साल के मुकाबले काफी गिरावट आई है। पशु भलाई बोर्ड केंद्रीय मेंबर मोहन ¨सह आहलूवालिया ने बचत भवन में सेहत विभाग, डेयरी विकास बोर्ड और पशु पालन विभाग के अधिकारियों, गोशाला चलाने वाली समाज सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों संग आयोजित बैठक में कहा कि एक्ट में कमियों के कारण मिलावटखोर आसानी से बच जाते हैं। संशोधन करने के बाद शर्तों को सख्त किया जाएगा। मौजूदा समय में मिलावटखोरी करने वाले पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना करने का प्रावधान है। जिसे बढ़ाया जाएगा।

दूध की सीधी सप्लाई को करें जागरूक

डेयरी और पशु पालन के धंधो में बहुत संभावनाएं हैं। यह ऐसे सहायक धंधे हैं जोकि किसानों की आर्थिकता को मजबूत कर सकते हैं। किसानों को इस बात के लिए जागरूक किया जाए कि वह आपस में ग्रुप बना कर दूध की सीधी मार्के¨टग करें। ताकि दूध के अच्छे भाव मिल सकें।

वेटरनरी अफसरों को दिलाएंगे चेकिंग का अधिकार

आहलूवालिया ने कहा कि मौजूदा समय में फूड सेफ्टी एक्ट अधीन दूध चैक करने का अधिकार केवल फूड सेफ्टी टीम को है। जल्द ही मुख्यमंत्री कैप्टन से मिलकर दूध के सैंपल भरने का अधिकार वेटरनरी अफसरों को दिलाने की पहल की जाएगी। बैठक में एसपी र¨वदर पाल ¨सह संधू, डिप्टी डायरेक्टर डेयरी हरपाल ¨सह, सहायक फूड कमिश्नर अदिती गुप्ता, फूड सेफ्टी अफसर जसप्रीत ¨सह औजला, डॉ. विशाल धवन, डॉ. मंजीत कुमार, डॉ. बहादर ¨सह, डॉ. मोहम्मद जमील, डॉ. रवीन्द्र ¨सह, डॉ. मेजर ¨सह, डॉ. संजीव कुमार कोहली, इंस्पेक्टर चरणजीत ¨सह और जगदीश ¨सह मौजूद थे।

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