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फतेहगढ़ साहिब में अकाली दल की 'पंजाब बचाओ रैली', BJP के साथ गठबंधन पर सुखबीर बादल ने साधी चुप्पी

Published: Sun, 06 Sep 2026 06:11 PM (IST)

सुखबीर बादल ने फतेहगढ़ साहिब में 'पंजाब बचाओ रैली' में AAP सरकार पर प्रशासनिक विफलता, कर्ज और कानून-व्यवस्था को लेकर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सुखबीर बादल ने AAP सरकार पर प्रशासनिक विफलता, कर्ज का आरोप लगाया

  2. अकाली दल ने पंजाब की अस्मिता और क्षेत्रीय संप्रभुता का मुद्दा उठाया

  3. भाजपा गठबंधन पर सुखबीर बादल की चुप्पी से सियासी अटकलें तेज

अरुण पाठक, बस्सी पठाना (फतेहगढ़ साहिब)। अनाज मंडी में शिरोमणि अकाली दल द्वारा आयोजित 'पंजाब बचाओ रैली' के जरिए अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने राज्य की सत्तासीन आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ जोरदार राजनीतिक हमला बोला।

रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने भगवंत मान सरकार को प्रशासनिक विफलता, बढ़ते कर्ज, कानून-व्यवस्था के संकट और संसाधनों की लूट के मुद्दों पर घेरा।

सुखबीर बादल ने पंजाब की अस्मिता और क्षेत्रीय संप्रभुता का मुद्दा उठाकर अपनी पार्टी के पारंपरिक कैडर को एकजुट करने का संदेश दिया।

रैली को संबोधित करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि मौजूदा "झाड़ू सरकार" के शासनकाल में पंजाब पूरी तरह से कर्ज और वित्तीय संकट के दलदल में धंस चुका है।

आप सरकार पर साधा निशाना

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के वित्तिय संसाधनों को विकास कार्यों के बजाय दिल्ली के इशारे पर अन्य राज्यों में पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए पानी की तरह बहाया जा रहा है।

अकाली दल के शासनकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि उस दौर में किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के हित में शुरू की गई तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं को मौजूदा सरकार ने या तो ठप कर दिया है या बेहद सीमित कर दिया है।

राज्य में गहराते गैंगस्टरवाद और नशे के कारोबार पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार में आम जनता खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रही है।

भाजपा संग गठबंधन पर साधी चुप्पी

पंजाब की भावी सियासत के संदर्भ में सुखबीर बादल का यह रुख बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य में राष्ट्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव के बीच अकाली दल खुद को एकमात्र 'प्रांतीय विकल्प' (रीजनल पार्टी) के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।

यही कारण है कि अपने संबोधन में उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि केवल एक प्रांतीय पार्टी ही पंजाब के जल, जमीन और अधिकारों की सच्ची पहरेदार हो सकती है। हालांकि, रैली के बाद जब भाजपा के साथ दोबारा चुनावी गठबंधन की अटकलों पर सवाल किया गया, तो सुखबीर सिंह बादल इस सियासी मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध गए।

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पंथक राजनीति और कोर वोटर बेस को साधे रखने के दबाव के बीच भाजपा के साथ रिश्तों को लेकर उनका यह टालमटोल वाला रवैया पंजाब के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

संबोधन के अंत में उन्होंने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि राज्य को बदहाली से निकालने के लिए एक मजबूत और समर्पित नेतृत्व की जरूरत है।

उन्होंने आह्वान किया कि पंजाब के गौरव को बहाल करने के लिए आने वाले चुनावों में शिरोमणि अकाली दल का समर्थन करें। इस रैली के मंच पर बलविंदर सिंह भूंदड़, डा. दलजीत सिंह चीमा, दरबारा सिंह गुरु, एडवोकेट अमरदीप सिंह धारनी, सरबजीत सिंह झिंझर, रमन गुप्ता, मनमोहन सिंह मकारोंपुर, गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना और अवतार सिंह रिया सहित कई प्रांतीय व स्थानीय नेता मौजूद रहे।

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