ईश्वर से जुड़कर प्रेम करना ही सच्ची भक्ति: सुदीक्षा

ब्रह्माज्ञान की प्राप्ति के बाद हृदय से जब भक्त और भगवान का नाता जुड़ जाता है तभी वास्तविक रूप में भक्ति का आरंभ होता है।