फरीदकोट, [ प्रदीप कुमार सिंह]। पंजाब में कोरोेना के संक्रमण के खतरे और कर्फ्यू के बीच बच्‍चों के लिए ऑनलाइन गेम पबजी (Pubg game) बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। कोटकपूरा में पब जी (प्लेयर्स अननोन बैटल ग्राउंड्स गेम) गेम ने दो विद्यार्थियों की जान ले ली। दोनों को पबजी गेम खेलते समय ब्रेन हैमरेज हुआ। मनोचिकित्सक का कहना है कि पबजी गम खेलने के दौरान स्ट्रेस लेबल बढऩे हार्ट पर असर पड़ता है। कई बार यह जानलेवा साबित होता है।

कोटकपूरा में पबजी गेम खेल रहे छात्रों को हुआ ब्रेन हैमरेज

राज्य में कर्फ्यू के कारण इन दिनों स्कूल बंद हैं। ज्यादातर स्कूल ऑनलाइन शिक्षा दे रहे हैं। ऐसे में बच्‍चों के हाथ में मोबाइल व टैब आ गया है। कई जगह सामने आया है कि मोबाइल और टैब पर वे पढ़ाई कम गेम ज्यादा खेल रहे हैं। वांदर जटाना के छात्र के दादा ने बताया कि उनका बेटा विदेश में रहता है। 18 वर्षीय पोता गांव में उनके साथ रहता है। वह 12वीं कक्षा में पढ़ता है।

मनोचिकित्सक बोले, स्ट्रेस लेबल बढ़ने से जानलेवा साबित हो रहा पबजी

उन्‍होंने बताया कि 15 अप्रैल को दोनों ने करीब नौ बजे साथ ही खाना खाया। इसके बाद पोता पढऩे के लिए अपने कमरे में चला गया। रात्रि करीब दो बजे जब उन्होंने पोते को देखा तो उसने हेडफोन लगा था और मोबाइल पर पबजी गेम चल रहा था। वह खुद बेड से नीचे बेदम पड़ा हुआ था। वह उसे तुरंत अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने मौत का कारण ब्रेन हैमरेज बताया है।

इसी तरह कोटकपूरा में दुकानदार का बेटा कर्फ्यू के दौरान ऑनलाइन ही पढ़ता था। ज्यादातर समय फोन उसके पास ही रहता था। इस बीच उसने टाइम पास करने के लिए पबजी खेलना शुरू कर दिया था। इसी के चलते 9 अप्रैल को ब्रेन हैमरेज होने के कारण उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। वह तीन बहनों के बीच इकलौता भाई है।

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इस तरह मौत के मुंह में ले जाता है पब जी

पबजी ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम हैं। गेम के अंदर में सौ लोग पैराशूट से एक द्वीप में उतरकर कई प्रकार के हथियारों को ढूंढकर स्वयं को बचाते हुए दूसरों को मारते हैं, जिसमें सुरक्षित क्षेत्र के गोलक में रहकर ही खेलना होता है। वह भी धीरे-धीरे छोटा होता जाता है ताकि जीवित खिलाड़ी एक दूसरे के आमने-सामने हो सकें। जो खिलाड़ी अंत तक खड़ा रहता है वह ही विजयी होता है। 

मनोरोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हरीश अरोड़ा ने बताया कि पबजी खेलते समय बच्‍चे स्ट्रेस ज्यादा ले लेते हैं, जिससे यह एरीटेशन और फिर एग्रीशन में बदल जाता है। इससे शरीर में कई तरह से नुकसानदायक रसायन बनते हैं, जो कि मानसिक विकार पैदा करने के साथ ही हार्ट को इफेक्ट करते हैं। गेम में बहुत ज्यादा उत्तेजना बढऩे से हार्ट इफेक्टिव होता है, जिसके कारण कई बार उसकी मौत भी हो जाती है।

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मानसिक रोगी बना देता है पब जी

प्रो. हरीश अरोड़ा ने बताया कि कर्फ्यू के कारण स्कूलों की तरफ से इस समय ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। ऐसे में पेरेंट्स को अपने टीनएज बच्‍चों के प्रति विशेष सजगता रखनी चाहिए, क्योंकि  पबजी गेम के लती बच्‍चे अक्सर रात में पैरेंट्स जब सो जाते हैं, तो वह छुप कर इसे खेलते हैं। तरह के गेम बच्‍चों को मानसिक रोगी भी बना देता है।

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बच्‍चों पर निगाह रखें अभिभावक : एसएमओ

फरीदकोट सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ चंद्रशेखर कक्कड़ ने बताया कि यह मल्टीप्लेयर गेम है। किशोरों में इसकी खासी लोकप्रियता है। ऐसे में पेरेंट्स को अपने बच्‍चों को कम से कम मोबाइल का प्रयोग करने देना चाहिए। साथ में उन पर निगाह भी रखनी चाहिए।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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