जागरण संवाददाता, फरीदकोट

मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेशानुसार धान की सीधी बुवाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के मिशन के तहत फरीदकोट प्रखंड के ग्राम अरैयांवाला कलां में समारोह का आयोजन किया गया। इसमें फरीदकोट निर्वाचन क्षेत्र के विधायक गुरदित सिंह सेखों ने ट्रैक्टर चलाकर धान की सीधी बिजाई शुरू की।

विधायक सेखो ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की हर समस्या के समाधान के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। डीसी ने डा. रूही दुग्ग ने बताया कि जिले में धान और बासमती की सीधी बिजाई के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग, भूमि रक्षा विभाग, पंजाब मंडी बोर्ड और बागवानी विभाग के 81 कर्मचारियों को विभिन्न गांवों में क्लस्टर अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। फरीदकोट जिले में लगभग 1,14,000 हेक्टेयर क्षेत्र में धान और बासमती की खेती की जाती है। डीसी ने किसानों से अपील की कि इस तकनीक से धान की बुवाई के लिए कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें और कोई भी तकनीकी जानकारी प्राप्त करें।

मुख्य कृषि अधिकारी फरीदकोट करनजीत सिंह गिल ने कहा कि इस योजना के तहत जो किसान सीधे इस तकनीक से धान और बासमती की बुआई करेंगे उन्हें 1500 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक सहायता दी जाएगी। डा. यदविदर सिंह, एडीओ ने सभी किसानों को इस विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सुखदीप सिंह एएसआई ने स्टेज सचिव की भूमिका में कहा कि यह तकनीक पानी, बिजली और श्रम की बचत करती है। गांवों में कैंप लगा कर दिया जाएगा नरमे की चुगाई का मुआवजा

संवाद सूत्र, श्री मुक्तसर साहिब

खेत मजदूर यूनियन की तरफ से जिला कार्यकारी प्रधान गुरजंट सिंह साउंके के नेतृत्व में दिए धरने के बाद एक शिष्टमंडल ने डीसी विनीत कुमार के साथ बैठक कर बताया कि गांवों में खेत मजदूरों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नरमा नुकसान में खेत मजदूरों के बनते हिस्से अदायगी करना मुख्य है जिस के लिए अभी तक सूचियां भी तैयार नहीं की गई। उन्होंने बताया कि जब नरमे की फसल बर्बाद हुई तो नरमा चुगने वाले मजदूरों के चूल्हे भी ठंडे पड़ गए। अब पंजाब सरकार नरमा खराबी का मुआवजा तो दे दिया है परंतु प्रशासन ने अभी तक खेत मजदूरों को अदायगी करने के लिए सूचियों ही नहीं बनाईं। कुछ गांवों में किसानों और कुछ गांवों में पंचायतों से सूचियां ली जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि प्रशासन सीधे रूप में सूची तैयार करे। उन्होंने मनरेगा का काम चलाने, मनरेगा का काम बंद होने के कारण और किए काम की अदायगी न होने के कारण मजदूरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ आटा दाल स्कीम के अंतर्गत राशन बांटने की भी मांग की गई।

डीसी ने वफद को भरोसा दिया कि नरमे की चुगाई का मुआवजा गांवों में कैंप लगा कर दिया जाएगा। इसलिए किसी जिमींदार के पास से दस्तखत कराने की कोई जरूरत नहीं। इसके साथ ही गेहूं की बांट जून माह में कर दी जाएगी। नरेगा का काम भी लगातार चलाया जाएगा। मजदूरों के गिरने वाले मकानों की पड़ताल करके बनती कार्यवाही की जाएगी।

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