जागरण संवाददाता, फरीदकोट

सरकारी बृजेंद्रा कालेज शिक्षा के अलावा पठन-पठान में अमूल्य योगदान देने के साथ ही साहित्य व विरासत संभालने में भी अपना अमूल्य योगदान दे रहा है। यहां से पढ़-लिख बाहर निकले एक-दो नहीं बल्कि अनेकों विद्यार्थी देश-दुनिया में फरीदकोट का नाम रोशन कर रहे हैं। फरीदकोट सूफी संत बाबा शेख फरीद की धरती है, यहां पर सूफी संगीत व साहित्य के समय-समय पर कई लोग पैदा हुए, जिन्होंने अपने विचारों से लोगों को रूबरू करवाया।

ऐसे ही सरकारी बृजेंद्रा कालेज फरीदकोट के संगीत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजेश मोहन हैं। प्रो. राजेश मोहन को भले ही आंख से कम दिखाई देता है, परंतु संगीत शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। वह सूफी गायकी के भी हुनरमंद है। उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों की संख्या में संगीत शिक्षा से लोगों को हुनरमंद बनाया, इसमें कई पंजाबी लोक गायकी में बुलंदियों को छुआ। उनकी खुद की भी आवाज में वह सादगी और कशिश है, जिसे लोग सुनना व समझना चाहते हैं।

प्रोफेसर राजेश मोहन बताते हैं कि उन्होंने हमेशा ही संगीत को ही अपना सबकुछ समझा। संगीत के लिए वह पूरी तरह से समर्पित रहे। उनकी समक्ष को देखते हुए सेमिनारों में अन्य साहित्यकारों के साथ उन्हें भी मंच पर पूरा स्थान मिलता है, जिसमें वह अपने विचारों को सांझा करते हैं। प्रोफेसर राजेश मोहन ने दिव्यांगों को सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए लंबी लड़ाई, जिसके बाद दिव्यांगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलना शुरु हुआ।

राजेश मोहन ने बताया कि फरीदकोट रियासतकालीन बृजेंद्रा कालेज खेल व पंजाबी सभ्याचारक को आगे बढ़ाने में भी अहम रोल अदा कर रहा है, खेलों में हाकी में कई ओलंपियन यहां से निकले और भंगड़ा इस कालेज का प्रसिद्ध रहा है, जिसने प्रदेश व देश स्तर पर कई पुरस्कार हासिल किए। उन्होंने कहा कि इस कालेज में हमेशा ही साहित्य, संगीत, खेलों को पढ़ने-पढ़ाने के साथ बढ़ावा दिया है।

Edited By: Jagran