जासं,फरीदकोट

डीसी विमल कुमार सेतिया ने बताया कि पंजाब सरकार व पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कृषि विभाग द्वारा पराली या अन्य कचरे को जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले से कहीं अधिक पराली जलने से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों में जागरूकता बढ़ी है। किसान जानते हैं कि पराली जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सेतिया ने बताया कि पंजाब सरकार के पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा टोल फ्री नंबर 1800-120-3667 और वाट्सएप नंबर 90351-72000 जारी किया गया है ताकि पर्यावरण को बनाए रखने और खूंटी जलाने की घटनाओं से निपटने के लिए शिकायतें दर्ज की जा सकें। इस पर कोई भी व्यक्ति या किसान पराली जलाने के संबंध में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही इस संबंध में सुझाव भी कर सकता है। इन नंबरों पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने पराली जलाने की समस्या से निजात पाने के लिए अधिक प्रभावित गांवों के रूप में चिह्नित गांवों में नोडल अधिकारी भी तैनात किए हैं। धान उत्पादक इन गांवों को ज्यादा प्रभावित करने वाला गांव माना जाता है, क्योंकि पूर्व में इन गांवों में धान की पराली में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन नोडल अधिकारियों को प्रत्येक प्रभावित गांव में तैनात किया गया है ताकि किसानों को पराली जलाने से बचने के बारे में जागरूक करने के अलावा धान की बाद की कटाई पर नजर रखी जा सके। पंजाब में पराली जलाने की प्रवृत्ति को रोकने के प्रयासों को और तेज करने के लिए पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सहकारिता, माल, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, कृषि, बागवानी एवं भूमि संरक्षण के कर्मचारियों को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है।

उपायुक्त ने जिले के किसानों से अपील की कि वे धान के भूसे को न जलाएं और इसे खेत में शपथ दिलाने को प्राथमिकता दें क्योंकि पर्यावरण को स्वच्छ रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।

Edited By: Jagran