प्रदीप कुमार सिंह, फरीदकोट

11 साल पहले राजस्थान नहर के किनारे शुरू हुआ श्री राधा-कृष्ण धाम लावरिस बच्चों का वारिशगाह बन गया है। स्थापना दिवस से लेकर अब तक राधा-कृष्ण धाम में नवजात से सात सात साल तक के 85 बच्चे पहुंचे जिन्हें अभिभावक के रूप में माता-पिता मिले। इन बच्चों को गोद लेने वालों में देश के विभिन्न हिस्सों से लोग तो आ रही है, साथ में अमेरिका व इटली से भी आ रहे हैं।

धाम में अब तक पहुंचे 85 बच्चों में 21 लड़के व 64 लड़कियां है। इनमें से तीन लड़के व तीन लड़कियों धाम है, जबकि अन्य बच्चों को लोगों द्वारा गोद लिया जा चुका है। इसमें से पांच बच्चों को अमेरिका व इटली के नागरिकों द्वारा गोद लिया गया है। धाम के प्रबंधन का काम कमेटी द्वारा देखा जा रहा है, जिसमें दीपक शर्मा, संदीप गर्ग, विनोद गोयल, कृष्ण गोपाल, पवन वंधवा, कृष्ण कुमार, मनोज जिदल, राकेश मोंगा शामिल है।

दीपक शर्मा व संदीप गर्ग ने बताया कि उनके यहां जो भी बच्चे आते हैं वह फिरोजपुर, श्रीमुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिडा, मोगा व फरीदकोट जिले से संबंधित हैं।

धाम के गेट पर लगे पंगूड़े में अब तक सात बच्चे आए। इसी तरह से अन्य बच्चे भी विभिन्न जिलों से पहुंचे। धाम में बच्चों की देखभाल के लिए प्रति बच्चा एक आया (दाई) रखी गई है, जो कि चौबीसों घंटे बच्चे के साथ होती है। इन बच्चों को दूध पीने के लिए धाम में देसी गाय पाली गई है। बच्चों को शुद्ध सब्जियां मिल सके, इसके लिए तीन एकड़ क्षेत्रफल में फैले राधा-कृष्ण धाम परिसर में आर्गेनिक सब्जियों की खेती भी की जा रही है। बच्चों के रहने के लिए वातानुकूलित कमरे बनाए गए है, और मनोरंजन के लिए कमरों में एलसीडी के साथ ही बच्चों के खेलने के संसाधन व झूले लगाए गए हैं। धाम के खर्चे दानी सज्जनों के सहयोग के अलावा धाम के लाईफ टाइम मेंबर बने लोगों द्वारा दी जा रही सहयोग राशि से हो रहे है।

दीपक शर्मा व संदीप गर्ग ने बताया कि धाम में एक वैन भी रखी गई है, जो बच्चों को स्कूल, अस्पताल अन्य स्थलों पर लाने ले जाने का काम करती है। धाम किसी बच्चे को गोद देने के लिए कानूनी प्राक्रिया का पूरी तरह से पालन करती है। धाम की स्थापना के 11 साल यानी स्टील एनवर्सी बीतने पर सभी लोग खुश, कि उन लोगों की मेहनत से 85 लावरिस बच्चों को उनके नए मां-बाप मिले है।

Edited By: Jagran