जासं, फरीदकोट

किसानों को पराली के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विभाग द्वारा सोमवार को खेतीबाड़ी दफ्तर में लगाए जा रहे जिला स्तरीय किसान प्रशिक्षण शिविर के लिए व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

मुख्य कृषि अधिकारी डा. बलविदर सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर में किसानों को रबी फसलों के बारे में तकनीकी व नवीनतम जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा कृषि विभाग के कृषि विज्ञानी किसानों को रबी फसलों की बुआई की विधि, पानी व उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग व कीटों,रोगों से फसलों की सुरक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।

डिप्टी डायरेक्टर डा. करनजीत सिंह गिल ने कहा कि किसान मेले में कुशलदीप सिंह ढिल्लों मुख्य मेहमान होंगे, जबकि डीसी विमल कुमार सेतिया विशेष अतिथि। संयुक्त निदेशक कृषि डा. समारोह की अध्यक्षता गुरप्रीत सिंह करेंगे।

उन्होंने बताया कि इस किसान मेले में कृषि पुस्तकों और कृषि प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया जाएगा। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी रीजनल सेंटर फरीदकोट के विशेषज्ञ कृषि समस्याओं का मौके पर समाधान उपलब्ध कराएंगे, ताकि किसानों को कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी दी जा सके। -------------- किसानों खेत में पराली मिलाकर गेहूं की बिजाई के लिए कर रहा प्रेरित

जासं,फरीदकोट

पंजाब सरकार द्वारा किसानों को पराली को जलाए बिना खेतों में अलग-अलग तरीकों से मिलाकर जमीन की उर्वरता शक्ति बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

डीसी विमल कुमार सेतिया, ने बताया कि पराली को जलाने से पर्यावरण व मानव सेहत को बहुत नुकसान पहुंचता है। ऐसे में जरूरत है कि किसान पराली को जलाएं नहीं बल्कि उसका सदुपयोग करें। डाक्टर रोड़े ने बताया कि पराली को मिट्टी में मिलाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि धान की कटाई से पहले ही विभाग ने जिले के विभिन्न गांवों में सेमिनार, किसान रैली आदि के माध्यम से किसानों को इस संबंध में जागरूक किया, जिसके परिणाम बहुत अच्छे दिखाई दे रहे हैं। किसानों द्वारा पराली को पावर प्लांटों को भेजा जा रहा है, जिससे पराली जलाए जाने की घटनाएं कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में धान की कटाई के बाद, विभाग ने अलग-अलग ब्लाकों, गांवों में हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, प्लो, मल्चर आदि के तरीकों को अपनाना शुरू कर दिया है, ताकि खेतों में पाराली मिलाकर किसानों को गेहूं बोने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि विभाग का यह अभियान किसानों को बहुत पसंद आ रहा है।

इस अभियान के तहत बड़ी संख्या में किसानों का उनके खेतों में परीक्षण किया गया, और वे इन तकनीकों के साथ अपनी सभी फसलों की बुवाई करने के लिए आश्वस्त हुए।

Edited By: Jagran