जागरण संवाददाता, फरीदकोट

प्रदेश की गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। गोशालाओं के विकास हेतु कऊसेस से प्राप्त धनराशि खर्च की जाएगी। गोशालाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए गोबर, गोबर से बॉयो गैस, बॉयो गैस से बिजली बनाने के साथ ही वर्मी कंपोस्ट तैयार करने पर काम चल रहा है।

पंजाब गोसेवा आयोग के चेयरमैन सचिन शर्मा ने उक्त जानकारी देते हुए कहा कि बेसहारा पशुओं की बढ़ती समस्या से लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए पंजाब सरकार इस पर गंभीरता से काम कर रही है। इसके तहत गोशालाओं को विकसित करने के साथ ही आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे है ताकि बेसहारा पशुओं को गोशालों में शरण मिल सके, और लोगों को इनसे होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।

उन्होंने बताया कि गोधन के उपचार हेतु पशुपालन विभाग द्वारा नियमित रूप से गऊ भलाई कैंप लगाए जाएंगे और जरूरत अनुसार विभाग द्वारा गऊधन का उपचार किया जाएगा। गोशालाओं की आमदनी बढ़ाने के लिए गोबर व गोमूत्र तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार द्वारा इन उत्पादों के लिए बाजार भी उपलब्ध करवाने के प्रयास होंगे।

शर्मा ने बताया कि प्रदेश के गोशालाओं में केन्द्रीय पशुधन भलाई बोर्ड की अलग-अलग स्कीम व ग्रांटों के प्रति जागरूक करने के लिए सेमिनार व कैंप का भी आयोजन किया जाएगा। गोशालाओं की भलाई हेतु दानी सज्जनों का भी सहयोग लिया जाएगा। फरीदकोट दौरे के दौरान शर्मा द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर गोशालाओं की स्थित व अब तक हो रहे कार्यो का जायजा लिया, इसके बाद उन्होंने सरकारी गऊशाला गोलेवाला का भी निरीक्षण किया।

इस अवसर पर कमीशन के उप-चेयरमैन कमलजीत चावला, एडीसी गुरजीत सिंह, पवन गोयल जिला योजना बोर्ड के अध्यक्ष, अशोक कुमार गुप्ता गौशाला आयोग के सदस्य भी उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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