'ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों का मुआवजा मिले...', फरीदकोट में नुकसान का जायजा लेने पहुंचे पूर्व CM चन्नी ने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने फरीदकोट में ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का जायजा लिया। उन्होंने किसानों, मजदूरों और कारोबारियों ...और पढ़ें
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ओलावृष्टि से बर्बाद फसलों का मुआवजा दे सरकार, किसानों के साथ मजदूरों को भी मिले राहत: चन्नी।
HighLights
चन्नी ने फरीदकोट में ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान का जायजा लिया।
किसानों, मजदूरों और कारोबारियों के लिए तत्काल मुआवजे की मांग की।
सरकार की कृषि नीतियों और मुआवजा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
जागरण संवाददाता, फरीदकोट। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी बुधवार को जिले के गांव खारा और वांदर जटाणा सहित आसपास के क्षेत्रों में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पिछले दिनों हुई वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया।
खेतों में बर्बाद हुई धान और बासमती की फसल दिखाते हुए उन्होंने पंजाब सरकार से किसानों को जल्द मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से किसानों के साथ-साथ मजदूरों, राइस मिल मालिकों और ईंट-भट्ठा कारोबारियों को भी नुकसान हुआ है, इसलिए सभी प्रभावितों को राहत दी जानी चाहिए।
चन्नी ने कहा कि एक एकड़ में सामान्य परिस्थितियों में 28 से 30 क्विंटल धान की पैदावार होती है, जिससे किसान को करीब 75 हजार रुपये की आमदनी हो सकती है। लेकिन ओलावृष्टि के कारण खेतों में फसल की बालियां तक नष्ट हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार नुकसान होने पर सरकार गिरदावरी करवाने की बात करती है, लेकिन किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिलता।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान नरमे की फसल को नुकसान पहुंचने पर किसानों को 17 हजार रुपये और मजदूरों को 1,700 रुपये की सहायता दी गई थी। उन्होंने मांग की कि इस बार भी नुकसान के अनुसार किसानों को मुआवजा दिया जाए और कुल मुआवजे का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा खेत मजदूरों को दिया जाए।
उन्होंने बताया कि तेज हवाओं के कारण कुछ राइस मिलों की छतें उड़ गईं और ईंट-भट्ठों की चारदीवारी को भी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने इन कारोबारियों को भी उचित मुआवजा देने की मांग की। इस दौरान उन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को मिलने वाले कैश क्रेडिट और ऋण की शर्तों में बदलाव का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने दावा किया कि पहले किसानों को करीब 2.5 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करवानी पड़ती थी, जिसे बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है। उनके अनुसार, इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने ऋण पर ब्याज दरों और जमीन गिरवी रखने से संबंधित शर्तों पर भी सवाल उठाए।
चन्नी ने डीएपी खाद की उपलब्धता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए पर्याप्त खाद नहीं मिल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि खाद की कमी और बढ़ती आर्थिक परेशानियों के कारण किसान मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इन नीतियों से पंजाब के किसानों पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने पंजाब सरकार पर केंद्र की नीतियों को लागू करने का आरोप लगाया।
अंत में चन्नी ने पंजाब सरकार से मांग की कि ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की तुरंत गिरदावरी करवाकर मुआवजे की घोषणा की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों और मजदूरों को राहत नहीं मिली तो उन्हें अपनी मांगों के लिए दोबारा सड़कों पर उतरना पड़ सकता है।
