संवाद सूत्र, फरीदकोट

कोविड-19 संक्रमण के चलते इस बार  ईद उल फितर का त्योहार बहुत ही सादगी के साथ मुस्लिम समाज के लोगों ईदगाह में  इमाम मौलाना मोहम्मद जायद द्वारा नमाज अदा करने के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सभी धर्मों के प्रमुख नेताओं  बलवंत सिंह खालसा, पंडित अवदेश पराशर, पादरी राजकमल  ने मुस्लिम भाईचारे को ईद उल फितर की मुबारकबाद दी।

मोहब्बत व भाईचारे की मिसाल रहे इस त्योहार की रौनक इस बार फीकी नजर आ रही थी। क्योंकि कोविड-19 संक्रमण (कोरोनावायरस) ने पूरी दुनिया के लाखों लोगों की जान को मुश्किल में डाल रखा है। हालात ऐसे हैं कि न तो लोग एक-दूसरे से गले मिल सकते हैं और न ही किसी से हाथ मिला सकते हैं। बस दूर से ही ईद की मुबारकबाद दी जा रही हैं। देश प्रमुख मस्जिदों के इमाम लगातार लोगों को सोशल डिस्टेंसिग का पालन करने और घर में नमाज पढ़ने में गुजारिश की जा रही हैं।

इस अवसर पर दिलावर हुसैन प्रधान मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी फरीदकोट ने बताया कि  ईद उल फितर इस्लाम मजहब का एक पवित्र त्योहार है। रमजान माह की समाप्ति के बाद चांद को देखकर इस त्योहार को मनाने की परंपरा है।  इस्लाम मजहब के इस पर्व को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। मीठी ईद इसलिए क्योंकि इस पर्व में खास तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसका इतिहास यह है कि  इस्लाम की तारीख के मुताबिक ईद उल फितर की शुरुआत जंग-ए-बद्र के बाद हुई थी। दरअसल इस जंग में मुसलमानों की फतह हुई थी जिसका नेतृत्व स्वयं पैगंबर मुहम्मद साहब ने किया था।

इस अवसर पर हनीस कुरैशी, अकबर अली, सफीकुल, मुन्ना खान, बशीर एहमद खान, इसराइल, इ़कबाल खान, सलीम खान, नाजीर अली, कमर अली आदि हाजिर थे।

Posted By: Jagran

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