चंडीगढ़ [शंकर सिंह]। भारतीय क्रिकेट टीम के जाबांज सितारे रहे युवराज सिंह की जानदार बल्‍लेबाजी और फील्डिंग में चीता जैसी फुर्ती ने लोगों को दीवाना बना दिया था। टी-20 विश्‍वकप में एक ओवर की सभी छह गेंदों पर उनके द्वारा लगाए गए छक्‍के लोगों को आज भी याद है। लेकिन यहां एक कार्यक्रम के दौरान आए युवी की बातें हौसला देने के संग जिंदगी के मायने भी बता गईं। उनकी ये बातें यकीनन आपमें भी नया जज्‍बा भर देंगी। 

कहा- इच्‍छाशक्ति से हर जंग जीत सकते हैं, जिंदगी सबसे जरूरी

कैंसर जैसे महरोग व मुसीबत को मात देने वाले सिक्‍सर किंग युवराज सिंह ने यहां बातचीत में दिल खोलकर अपने दर्द और जद्दोजहद को बयां किया। युवराज ने कहा, 'पलंग पर लेटे-लेटे ये ख्याल अकसर आता रहा कि जिंदगी कितनी जरूरी है। ये ख्यालत मुझे जीने के लिए भी प्रेरित करते थे। इसी ख्याल को जरूरी समझते हुए ठाना कि कैंसर को हराना है और हर हाल में हराना है। इसके लिए सबसे जरूरी थी इच्‍छाशक्ति। साफ-साफ समझ में आ गया कि आपकी इच्छाशक्ति ही इस महारोग को परास्‍त कर सकती है। इससे हर जंग को जीेत सकते हैं।'

कार्यक्रम के दौरान युवराज सिंह।

युवराज बोले, यह इच्छाशक्ति तभी आती है जब कोई आपके साथ हो। मैं चाहता हूं लोगों के साथ रहूं। जीने के लिए और इस बीमारी को खत्म करने के लिए भी। ऐसे में मैंने यूवीकैन नाम से क्लोथिंग लाइन शुरू की, जिससे कैंसर से जुड़े मरीजों के लिए चैरिटी कर सकूं।

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युवी बोले- देखो मैं ठीक हूं और खुश भी

युवराज सिंह ने कहा, ' देखो मैं ठीक हूं और खुश भी।' लोगों कोयही संदेश देना चाहता हूं कि कैंसर को हर कोई हरा सकता है। मैं इससे जीत सकता हूं तो आप भी इसे परास्‍त कर सकते हैं, बस जरूरी है तो इच्छाशक्ति। वह वीआर मोहाली में युवीकैन के अपने स्टोर को लाॅन्‍च करने पहुंचे थे।

कामयाब था पर तब तक शादी नहीं हुई थी

पत्‍नी हेजल के साथ युवराज सिंह। (फाइल फोटो)

युवराज ने कहा, कैंसर के बाद जीवन में बहुत से विचार उत्पन्न होने लगे। इसमें ये भी था कि क्या जीवन से सब कुछ पा चुका हूं। उस दौरान तक शादी नहीं हुई थी। अब हो गई है तो ये भी अच्छा अहसास है। शादी के बाद आपका जीवन बदलता है। हर दिन आप भगवान का शुक्रिया करते हैैं कि आपको ये दिन नसीब हुआ।

रोजाना 300 एप्लीकेशन आती है

युवराज ने कहा, यूवीकैन फाउंडेशन बनाने के बाद से अब उन्हें रोजाना 300 एप्लीकेशन आती है। दुख है कि भारत में कैंसर का ट्रीटमेंट बहुत महंगा है, ऐसे में चाहता हूं कि खुद लोगों की मदद करूं। अभी हमारी फाउंडेशन 50 बच्चों की पढ़ाई को स्पॉन्सर कर रही है, जिन्होंने कैंसर को हराया। मेरा ध्यान पंजाब पर भी है, जहां कैंसर तेजी से पांव पसार रहा है। यह लड़ाई थोड़ा मुश्किल तो है, लेकिन मैं इससे लड़ता रहूंगा। नेक कार्य में लोग सहयोग कर हैं। सबसे जरूरी हमारी क्रिकेट टीम भी इस प्रयास में मेरे साथ हैै।

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कार्यक्रम के दौरान युवराज मां शबनम सिंह और भाई जोरावर सिंह।

खुद चेक करता हूं डिजाइन

युवराज ने कहा, उन्होंने क्‍लॉथ रेंज स्टोर खोला है तो वह इस पर ध्यान भी देते हैं। इसके हर डिजाइन को चेक करते हैैं। ज्यादातर स्पोर्ट्स कैटेगरी में ड्रेस को डिजाइन किया जाता है। वह बोले, मैं स्पोर्ट्स को हर जगह प्रोमोट करता हूं। स्पोर्ट्स में हूं शायद इसलिए भी मेरे अंदर जीतने की भावना हमेशा रही।

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बोले- असली कामयाबी किसी की जिंदगी बदलना या उसे जिंदगी से मिलवाना

युवराज ने कहा, 'ब्रांड्स की बात करूं तो मुझे बचपन में ये ज्यादा आकर्षित करते थे, लेकिन अब मैं जो कंफर्टेबल हो वही पहनता हूं। इन दिनों कई विचार वैसे भी बदल गए हैैं। हमने नाम कमाया तो हम कामयाब कहलाते हैं। लेकिन, मेरे अनुसार असली कामयाबी वही है जब हम किसी के लिए कुछ करते हैं, उसकी जिंदगी बदलते हैैं या उसे वापिस जिंदगी से मिलवाते हैैं।

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Posted By: Sunil Kumar Jha