चंडीगढ़ [डॉ. सुमित सिंह श्योराण]। सुखना लेक पर तीसरे मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में देशभर से कई बड़े अफसर और खास मेहमान मौजूद थे, लेकिन उनमें से एक शख्स फौजी वर्दी में जिसके सीने पर कई मेडल थे सबके आकर्षण का केंद्र था। लोगों द्वारा उसके साथ सेल्फी लेने का दौर बहुत देर तक चला। जो भी उनके पास आता उनके साथ इन पलों को यादगार बनाने के लिए फोटो की रिक्वेस्ट करता।

जंग में बहादुरी के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित परमवीर मेडल पाने वाले सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव मिलिट्री फेस्टिवल में सभी के आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी उनकी बहादुरी के किस्सों को उन्हीं की जुबानी सुनने को बेताब थे। मिलनसार स्वभाव के योगेंद्र सिंह ने इस मौके पर युवाओं का खूब उत्साह बढ़ाया। दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में यादव ने कहा कि युवाओं का जोश देकर उन्हें अच्छा लगता है। उन्होंने युवाओं के साथ कारगिल की जंग से जुड़े कई अनसुनी यादों को भी साझा किया।

देशभर के स्कूल कॉलेजों से निमंत्रण योगेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें युवाओं से मिलना अच्छा लगता है। उन्होंने बताया कि देशभर के स्कूलों और कॉलेजों से उन्हें बच्चों को मोटिवेट करने के लिए बुलाया जाता है। यादव हर महीने दो से तीन कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। इस समय बरेली में पोस्टेड यादव ने कहा कि पेरेंट्स कभी भी खुद की पसंद को बच्चों पर न थोपे। चंडीगढ़ शहर उन्हें काफी पसंद है जब भी मौका मिला वह यहां के बच्चों से फिर मिलने जरूर आएंगे।

यादव के अनुसार युवाओं में देश के प्रति जोश भर उन्हें अच्छा लगता है। कारगिल जंग की कहानी योगेंद्र की जुबानी मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में योगेंद्र यादव को संवाद कार्यक्रम के तहत खास तौर से स्कूली बच्चों और युवाओं के साथ अपने अनुभवों को साझा करने के लिए आमंत्रित किया था। उन्हें 14 और 15 दिसंबर दो दिन बच्चों से मिलना था लेकिन किन्हीं कारणों से वह शुक्रवार का दिन ही दे सके।

उधर, मौसम खराब होने के कारण भी उनका सेशन उस तरह से नहीं हो पाया। लेकिन उन्होंने सुखना लेक पर पहुंचे बच्चों के अलग-अलग ग्रुप के पास खुद जाकर उनसे आर्मी और देश को लेकर उनके विचार जाने। मिलिट्री फेस्ट में इस समय देश में जीवित तीन परमवीर चक्र विजेताओं में से सिर्फ योगेंद्र यादव ही पहुंचे, जबकि कैप्टन बाना सिंह और संजय कुमार किन्ही कारणों ने नहीं पहुंच सके।

17 गोलियां लगी फिर भी जंग जीते योगेंद्र यादव को 1999 में कारगिल युद्ध में अदम्य साहस के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है। कारगिल की टाइगर हिल चोटी पर जीत के लिए इन्होंने जान की बाजी लगा दी थी, इस युद्ध में यादव को 17 गोलियां लगी लेकिन उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों के कब्जे से टाइगर हिल को मुक्त करवाया। 72 घंटे तक जंग लड़ी और फिर 16 महीने तक अस्पताल में रहकर फिर से देश की सेवा कर रहे हैं।

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