चंडीगढ़, जेएनएन। शरीर की फिटनेस और फेफड़ों की मजबूती के लिए गोमुखासन रामबाण है। गवर्नमेंट योग एजुकेशन एंड हेल्थ -23 के योगाचार्य रोशन लाल बताते हैं कि इस योग के अभ्यास के दौरान हमारी पीठ सीधी रहती है, और जब हमारी पीठ सीधी रहती है तो हमारे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य रहता है। इसके अलावा इसके अभ्यास के दौरान फेफड़ों में अतिरिक्त फैलाव होता है,जिससे हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं। कोरोना पीड़ित व स्वस्थ व्यक्ति को इसका रोजाना अभ्यास करना चाहिए।

गोमुखासन करने की विधि

  • हवादार स्थान पर चटाई बिछाकर सुखासन मुद्रा में बैठ जाएं।
  • इसके बाद अपने बांए पैर को अपने शरीर की ओर खींच के उसे अपने पास ले आएं।
  • उसके बाद अपने दाएं पैर को बांए पैर की जांघों के ऊपर रखें और उसे भी खींच के अपने शरीर के पास ले आएं।
  • अब अपने दाएं हाथ को कंधे के ऊपर करें और कोहनी के यहां से मोड़ के अपनी पीठ के पीछे जितना अधिक हो सकता हैं ले जाएं।
  • अब अपने बाएं हाथ को भी कोहनी के यहां से मोड़े और पेट के साइड से पीछे की ओर पीठ पर लेके जाएं।
  • अब दोनों हाथों को खींच के आपस में मिलाने की कोशिश करें। और पीठ के पीछे हाथों को एक दूसरे से पकड़ लें।
  • अब इस आसन में कुछ देर तक रहें और 10-12 बार सांस लें।
  • जब आपको इस स्थिति में असुविधा होने लगे तो आप पुनः अपनी प्रारंभिक स्थिति में आएं। इसके लिए अपने दोनों को हाथों को खोलें और पैरों को सीधा करें।

गोमुखासन करने क्या सावधानियां बतरनी चाहिए

  • बवासीर रोगियों को इस अासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • जिन लोगों को हाथ या पैर में ज्यादा दर्द होती है उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन को करते समय शरीर के साथ ज्यादा जोर जबरदस्ती न करें।

गोमुखासन करने के फायदे

  • गोमुखासन करने से रीड की हड्डी मजबूत होती है।
  • फेफड़ों को मजबूत बनाता है।
  • मधुमेह रोगियों के रामबाण है।
  • कमर दर्द से आराम मिलता है।
  • शरीर में लचीलापन बढ़ाता है।
  • मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
  • अस्थमा रोगियों के उपयोगी है।