मोहाली, जेएनएन। जिला मोहाली में सात नगर काउंसिलों व नगर निगम में जिस तरह से चुनाव के दौरान 50 फीसद वार्ड महिलाओं के लिए रिजर्व किए गए थे। उसी प्रकार मेयर और अध्यक्ष पद भी महिलाओं के लिए रिजर्व किए जा सकते हैं। स्थानीय निकाय विभाग पहले की तरह रिजर्वेशन की रोटेशन कर सकता है। विभाग जल्द ही इसको लेकर फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर सकता है।

मोहाली नगर निगम का मेयर पद पर भी महिला को कमान मिल सकती है। इसको लेकर कांग्रेसी खेमे में मंथन जारी है। अगर मेयर पद रिजर्वेशन में आया तो सेहत मंत्री के भाई अमरजीत सिंह जीती सिद्धू के लिए मेयर बनना सपना साबित हो सकता है। क्योंकि जीती ही शहर में मेयर पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। नगर निगम और नगर काउंसिल के चुनाव होने के बाद मेयर और अध्यक्ष पदों की रिजर्वेशन को लेकर सरकार हरकत में है। इसके बाद कांग्रेसी खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। रिजर्वेशन के कारण कई जगह अध्यक्ष बनने वालों की मंसूबों पर पानी फिर सकता है। इसलिए हर कोई अपने पक्ष में रिजर्वेशन करवाने के लिए पार्टी हाईकमान के चक्कर काट रहा है।

पिछले दिनों हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी, लेकिन फाइनल नोटिफिकेशन आने के बाद साफ हो पाएगा कि कौन-कौन से नगर निगम और काउंसिल के मेयर और अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए रिजर्व किया गया है।

फरवरी 2015 में हुए नगर निगम के पहले चुनाव के बाद अकाली दल को बहुमत नहीं मिला था। इस दौरान भी तत्कालीन अकाली सरकार ने मेयर का पद जरनल लेडी पार्षद के लिए रिजर्व कर दिया था। इसको कुलवंत सिंह की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसके बाद सरकार ने यह आदेश वापस भी ले लिए थे। कुलवंत सिंह को मेयर पद से दूर रखने के लिए यह कार्रवाई की गई थी, लेकिन कोर्ट से मिली राहत के बाद कुलवंत सिंह कांग्रेस की मदद से मेयर बने थे और अकाली दल को सत्ता दूर रखा था। बाद में कुलवंत सिंह भी अकाली दल में शामिल हो गए थे।

2006 में तत्कालीन सरकार के समय में नगर काउंसिल मोहाली के चुनाव कराए गए थे। जिसमें कांग्रेस ने भारी बहुमत से राजेंद्र सिंह राणा को अपना अध्यक्ष बनाया। इस चुनाव के कुछ महीने बाद ही विधानसभा चुनाव हुए थे। जिसमें कांग्रेस सरकार हार गई थी और अकाली दल ने पंजाब में सरकार बनाई थी। साल 2010 में कांग्रेस की नगर काउंसिल को समय से पहले ही भंग कर दिया गया था और काउंसिल की जगह शहर में नगर निगम बना दी गई थी।

पूर्व मेयर कुलवंत सिंह की अगुआई वाली अकाली दल की नगर काउंसिल का कार्यकाल अप्रैल में पिछले साल खत्म हो गया था। इसके बाद तुरंत चुनाव न करवा कर कोरोना काल का सहारा लेकर यह चुनाव करीब 10 महीने बाद करवाए गए। अकाली दल ने राणा की अगुआई वाली नगर काउंसिल को भंग करने के पांच साल बाद नगर निगम के पहले चुनाव करवाए थे। पांच साल तक अधिकारियों के जरिये पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल ने खुद शहर को संभाला था। चुनाव के बाद भी अकाली दल को बहुमत नहीं मिला।

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