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झोटा हत्याकांड की होगी CBI जांच? अकाली सांसद हरसिमरत कौर बादल ने अमित शाह से की मांग

Published: Mon, 19 Oct 2026 02:48 PM (IST)

हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से परविंदर सिंह झोटा की हत्या की सीबीआई जांच और पंजाब ...और पढ़ें

झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच कराएं अमित शाह: हरसिमरत बादल।

झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच कराएं अमित शाह: हरसिमरत बादल।

HighLights

  1. परविंदर सिंह झोटा की हत्या की सीबीआई जांच की मांग

  2. पंजाब में राजनीतिक-पुलिस नशा गठजोड़ की व्यापक जांच हो

  3. नशा कारोबार में उच्च स्तरीय संरक्षण के गंभीर आरोप

रोहित कुमार, चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने पंजाब में नशा तस्करी के कथित राजनीतिक-पुलिस गठजोड़ की व्यापक जांच कराने की भी मांग उठाई है। अमित शाह को लिखे पत्र में हरसिमरत ने आरोप लगाया कि झोटा के पिता भीम सिंह की ओर से पुलिस को दिए गए बयान पर कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि पिता के बयान में लगाए गए सभी आरोपों की जांच सीबीआई से कराई जाए।

हरसिमरत बादल ने लगाए कई गंभीर आरोप

हरसिमरत बादल ने दावा किया कि भीम सिंह ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि उनके बेटे की हत्या पंजाब में नशा कारोबार से जुड़े राजनीतिक और पुलिस गठजोड़ के कारण हुई। इस गठजोड़ को मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्य के डीजीपी गौरव यादव सहित शीर्ष स्तर से संरक्षण मिलने का आरोप भी लगाया गया है।

हरसिमरत के अनुसार, भीम सिंह ने बताया कि परविंदर ने मेडिकल स्टोर के मालिक अश्विनी कुमार के पास जाने से पहले मानसा के डीएसपी को इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि गोली मारने से पहले अश्विनी कुमार की किसी व्यक्ति से फोन पर लंबी बातचीत हुई थी, जिससे साजिश की आशंका पैदा होती है।

सांसद ने आरोप लगाया कि परविंदर ने मानसा में मेडिकल स्टोरों के माध्यम से कथित तौर पर चल रहे नशा कारोबार को उजागर किया था। इसके बाद उसे झूठे मामलों में फंसाकर गिरफ्तार किया गया और जेल भेजा गया। हरसिमरत के मुताबिक, भीम सिंह ने तत्कालीन मानसा एसएसपी और डीजीपी पर इन मामलों के पीछे होने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बेटे के जेल में रहने के दौरान एसएसपी ने उसके नशा कारोबार के खिलाफ आवाज उठाते रहने पर जान से मारने की धमकी दी थी।

पत्र में तत्कालीन डीएसपी संजीव गोयल पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हरसिमरत के अनुसार, भीम सिंह ने दावा किया कि गोयल के पास नशीले पदार्थ बनाने की सुविधाएं थीं, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता था।

उन्होंने मानसा के ड्रग इंस्पेक्टर शीशम मित्तल पर नशा माफिया से मिलीभगत और मेडिकल स्टोरों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया। इसके अलावा तत्कालीन एसएसपी नानक सिंह और डीएसपी संजीव गोयल पर नशा कारोबार से जुड़े आरोपितों को संरक्षण देने का दावा किया गया है। हरसिमरत ने वर्तमान सब डिवीजन डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल और थाना प्रभारी बयंत कौर की भूमिका की भी जांच की मांग की।

हथियार लाइसेंस देने पर भी उठाए सवाल

हरसिमरत ने कहा कि हत्या के दिन पुलिस के मेडिकल स्टोर तक पहुंचने में हुई देरी और गोली चलाने से पहले आरोपित की फोन पर बातचीत की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अवैध रूप से मनोप्रभावी दवाएं बेचने के मामले में जेल से रिहा होने के कुछ महीने बाद वर्ष 2024 में अश्विनी कुमार को मानसा के एसएसपी की ओर से हथियार का लाइसेंस कैसे जारी किया गया।

उन्होंने सीबीआई जांच के दायरे में ड्रग इंस्पेक्टरों, पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक लोगों की भूमिका शामिल करने की मांग की। साथ ही नशा विरोधी कार्यकर्ताओं को दबाने में पुलिस के कथित इस्तेमाल की भी जांच कराने को कहा।

हरसिमरत ने सुनाम के मोहनजीत सिंह शेरों का मामला भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम में चिट्टे की बिक्री के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध करने पर शेरों को प्रताड़ित किया गया था।

उन्होंने वित्त मंत्री हरपाल चीमा से चिट्टे की खुलेआम बिक्री पर सवाल उठाने के बाद गुलजार सिंह की आत्महत्या का मामला भी उठाया। हरसिमरत ने कहा कि पंजाब में नशे के पूरे नेटवर्क की व्यापक जांच से ही कथित तस्करों और उन्हें संरक्षण देने वालों की भूमिका सामने आ सकेगी।