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क्या बदलेगा 'एट होम' का नाम? राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को भेजा सुझाव; ब्रिटिश परंपरा को बदलने की मांग

Published: Mon, 17 Aug 2026 04:08 PM (IST)

अधिवक्ता अजय जग्गा ने पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस के 'एट होम' समारोहों के लिए भारतीय शब्दावली अपनाने का आग्रह किया है।

पंजाब का राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया। फाइल फोटो

पंजाब का राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया। फाइल फोटो

HighLights

  1. अधिवक्ता अजय जग्गा ने 'एट होम' शब्दावली बदलने की मांग की।

  2. राज्यपाल को पत्र लिखकर भारतीय नाम अपनाने का आग्रह किया।

  3. 'राजकीय स्नेह मिलन' जैसे भारतीय नामों का सुझाव दिया गया।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोक भवन में आयोजित होने वाले स्वागत समारोहों के लिए इस्तेमाल होने वाली ‘एट होम’ शब्दावली को बदलकर भारतीय अभिव्यक्ति अपनाने की मांग उठी है। अधिवक्ता एवं प्रशासक सलाहकार परिषद के सदस्य अजय जग्गा ने पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया को पत्र भेजकर इस संबंध में पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

जग्गा ने पत्र में कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह का निमंत्रण पत्र हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं में तैयार किया गया, जो स्वागत योग्य पहल है । लेकिन इसमें हिंदी और पंजाबी में ‘एट होम’ शब्द का प्रयोग अब भी किया गया है। उनके अनुसार स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों से जुड़े संवैधानिक समारोहों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय भावना को प्रतिबिंबित करने वाली शब्दावली अधिक उपयुक्त होगी।

ब्रिटिश सामाजिक परंपरा से जुड़ा है एट होम

जग्गा ने अपने पत्र में एट होम शब्द की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश समाज में घर पर आयोजित स्वागत समारोहों, सामाजिक मेल-मिलाप और चाय समारोहों के लिए किया जाता था। उन्होंने पुराने ब्रिटिश शिष्टाचार साहित्य का हवाला देते हुए कहा कि यह शब्दावली बाद में ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न हिस्सों और उपनिवेशों तक भी पहुंची।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्वतंत्रता के बाद भारत में ‘एट होम’ को एक अलग आधिकारिक और औपचारिक अर्थ मिल गया तथा राज्यपालों द्वारा स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर आयोजित स्वागत समारोहों के लिए इसका लगातार इस्तेमाल होता रहा है।

‘राजकीय स्नेह मिलन’ जैसे नाम सुझाए

अजय जग्गा ने कहा कि परंपरा को समाप्त करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि केवल उसकी शब्दावली को भारतीय स्वरूप देने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने ‘राजकीय स्नेह मिलन समारोह’, ‘स्वागत एवं स्नेह समारोह’, ‘अभिनंदन समारोह’, ‘राष्ट्र पर्व स्नेह समारोह’ और ‘राष्ट्रीय अभिनंदन समारोह’ जैसे नाम सुझाए हैं।उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि इस मामले पर गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित प्राधिकारियों से परामर्श कर उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि यदि बदलाव स्वीकार किया जाता है तो इसे 26 जनवरी 2027 के गणतंत्र दिवस अथवा 15 अगस्त 2027 के स्वतंत्रता दिवस से लागू किया जा सकता है।