राजेश ढल्ल, चंडीगढ़

शहर में 50 फीसद से ज्यादा कर्मचारी वर्ग और उनके परिवार की वोट है। जो दल इनकी वोट लेने में कामयाब रहेगा उसका नगर निगम में मेयर बनना तय है। ऐसे में सरकारी कर्मचारियों से जुड़ी मांग और समस्याएं निगम चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। राजनीतिक दलों की ओर से जो घोषणा पत्र तैयार किए जा रहे हैं, उसमें भी सरकारी स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जाएगा। शहर में प्रशासन और नगर निगम के अलावा हरियाणा- पंजाब के सरकारी कार्यालयों में काम करने के अलावा केंद्र सरकार के कर्मचारी भी रहते हैं, जो कि समय-समय पर अपनी समस्याओं को लेकर मांग उठाते रहते हैं। शहर में करीब 15 हजार सरकारी मकान भी हैं। जहां पर कर्मचारी अपने परिवार के साथ रहते हैं। प्रशासन और नगर निगम के कर्मचारियों पर पंजाब के नियम लागू होते हैं। अकेले नगर निगम में ही 40 फीसद कर्मचारियों का टोटा है। नगर निगम में इस समय 10 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी ने कर्मचारियों के वोट को देखते हुए अपने यहां पर इंप्लाइज सेल का भी गठन किया हुआ है। यूटी कर्मचारियों की मांग है कि जो डेपुटेशन पर अधिकारी दूसरे राज्यों से आते हैं उस पर रोक लगाकर चंडीगढ़ में काम कर रहे यूटी कैडर के कर्मचारियों को प्रमोट करना चाहिए। चुनाव के लिए हर वार्ड में सरकारी कर्मचारी काफी संख्या में रहता है। कौन-कौन सी प्रमुख मांगे हैं कर्मचारियों की

साल 2008 की हाउसिग स्कीम के तहत बनने वाले चार हजार फ्लैट का निर्माण करना। इस स्कीम के लिए कर्मचारी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।

-सरकारी कार्यालयों में खाली पड़े पदों को तत्काल प्रभाव से भरना

-अस्थायी कर्मचारियों को पक्का करना, अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति सीधा निजी कंपनी से करने के बजाए विभाग ही करे

-अनुकंपा के आधार पर मृतक कर्मचारी के परिवार के सदस्य को नौकरी देना

-बिजली और सीटीयू विभाग का जो निजीकरण किया जा रहा है उसे रोका जाए।

-कोरोना काल का जो डीए रोका हुआ है उसे जारी करना इन सेक्टरों में हैं कर्मचारियों को बोलबाला

सेक्टर-22, 23, 7, 15, 19, 33, 11 में सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी अपने परिवार के साथ रहते हैं। इसके अलावा पीयू, पेक, सेक्टर-32 जीएमसीएच अस्पताल का अपना हाउसिग कैंपस है जहां पर कर्मचारी रहते हैं।

कोट्स

कर्मचारी कई समस्याओं से जूझ रहा है। साल 2008 की हाउसिग स्कीम के तहत जल्द से जल्द फ्लैट का निर्माण किया जाए। डेपुटेशन पर अधिकारी दूसरे राज्यों से तीन साल के लिए आते हैं, जिनका शहर से कोई लेना-देना नहीं होता है। यूटी के कर्मचारियों को प्रमोट कर उन पदों पर बिठाया जाना चाहिए।

हरजिदर सिंह, सीनियर उपाध्यक्ष, इंटक

शहर की आधी आबादी कर्मचारी और उनके परिवार की है। इस समय कर्मचारियों को अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। प्रशासन को विभागों को निजीकरण करने की नीति पर रोक लगानी चाहिए। पंजाब की तर्ज पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी परिवार के सदस्य को दी जानी चाहिए।

राजिदर कुमार, महासचिव, यूटीएसएस फेडरेंशन सीटीयू की बसों का जो निजीकरण किया जा रहा है वह गलत है। यूनियन इसका खुलकर विरोध कर रही है। सीटीयू में बहुत से पद कई सालों से खाली पड़े हैं, जिस कारण वर्तमान में काम करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। आउटसोर्स पर कर्मचारी रखने की स्कीम को रद कर देने चाहिए।

धरमिदर सिंह राही,अध्यक्ष, सीटीयू वर्कर्स यूनियन शहर में प्रापर्टी काफी महंगी है। पूरा साल शहर की सेवा करने के बाद भी कर्मचारी एक मकान नहीं बना पाता है। प्रशासन को अपने कर्मचारियों के पुनर्वास के लिए हाउसिग स्कीम को लागू करना चाहिए। इंटर डिपाटमेंट ट्रांसफर की नीति पर रोक लगानी चाहिए।

बिपिन शेर सिंह, चेयरमैन, आल कंट्रैक्चुअल कर्मचारी संघ

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