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चंडीगढ़ में व्हील चेयर के पहियों पर दौड़ा जुनून, बल्ले से बरसे चौके-छक्के; फील्डिंग में भी दिखी गजब की रफ्तार

Published: Sat, 19 Sep 2026 07:13 PM (IST)

चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में व्हीलचेयर क्रिकेट मुकाबले में खिलाड़ियों ने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अद्भुत जज्बा दिखाया। चंडीगढ़ टीम ने पंजाब को हराकर ट्रॉफी जीती।

सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज में व्हील चेयर क्रिकेट प्रतियोगिता में जीत का जश्न मनाती चंडीगढ़ की टीम। फोटो : उपेंद्र सेन गुप्ता

सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज में व्हील चेयर क्रिकेट प्रतियोगिता में जीत का जश्न मनाती चंडीगढ़ की टीम। फोटो : उपेंद्र सेन गुप्ता

HighLights

  1. डीएवी कॉलेज में व्हीलचेयर क्रिकेट मुकाबले का आयोजन।

  2. चंडीगढ़ टीम ने पंजाब को हराकर ट्रॉफी पर कब्जा किया।

  3. खिलाड़ियों ने शारीरिक सीमाओं को पार कर खेल भावना दिखाई।

रवि अटवाल, चंडीगढ़। सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज का क्रिकेट मैदान शनिवार को कुछ ऐसे नजारे का गवाह बना, जिसने खेल की परिभाषा ही बदल दी। व्हीलचेयर पर बैठे खिलाड़ी गेंदबाजी कर रहे थे, उसी स्थिति में बल्लेबाज जोरदार शॉट लगा रहे थे और फील्डर गेंद के पीछे अपनी व्हीलचेयर दौड़ा रहे थे।

कहीं हाथ से गेंद को रोकने की कोशिश थी तो कहीं खिलाड़ी ने अपनी व्हीलचेयर से ही गेंद की राह रोक दी। शरीर की चुनौतियों के बावजूद खिलाड़ियों का हौसला मैदान पर पूरी तरह बुलंद नजर आया।

व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन, चंडीगढ़ की ओर से आयोजित टी-20 मुकाबलों में चंडीगढ़ की टीम ने पंजाब को पहले दोनों मुकाबलों में शिकस्त देकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। हालांकि, मुकाबले का असली आकर्षण जीत-हार से कहीं ज्यादा खिलाड़ियों का जज्बा और खेल के प्रति उनका जुनून रहा।

व्हीलचेयर पर बैठकर गेंदबाजी आसान नहीं

मैदान पर गेंदबाज के लिए व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे गेंद को सही दिशा और गति देना अपने आप में बड़ी चुनौती थी। गेंद फेंकने के लिए शरीर का संतुलन बनाए रखना और बल्लेबाज के सामने गेंद को सटीक जगह पर पहुंचाना आसान नहीं था। इसके बावजूद गेंदबाज पूरे आत्मविश्वास के साथ गेंद लेकर तैयार होते और अपने अंदाज में गेंद को बल्लेबाज की ओर भेजते।

बल्लेबाज भी कुछ कम नहीं

सामने बल्लेबाज भी व्हीलचेयर पर ही बैठा होता। गेंद आते ही वह पूरे दमखम के साथ बल्ला घुमाता और कई बार गेंद को मैदान के पार भेजने में सफल रहता। चौका लगने के बाद साथी खिलाड़ियों की खुशी और मैदान में गूंजती तालियां खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ा देती थीं। 

फील्डिंग में भी दिखी गजब की फुर्ती

सबसे दिलचस्प दृश्य फील्डिंग के दौरान देखने को मिला। गेंद जैसे ही किसी दिशा में जाती, खिलाड़ी अपनी व्हीलचेयर तेजी से दौड़ाते हुए उसके पीछे पहुंच जाते। कई बार गेंद हाथ में आने से पहले ही व्हीलचेयर के पहिये से टकराकर रुक जाती।

खिलाड़ी तुरंत उसे उठाते और वापस थ्रो कर देते। विकेट बचाने और रन रोकने के लिए खिलाड़ियों की यह कोशिश उनके जुनून को बयां कर रही थी।

खेल का जुनून शारीरिक चुनौतियों का मोहताज नहीं

‘स्ट्रॉन्गर विदाउट ड्रग्स’ थीम पर आयोजित इस मुकाबले में खिलाड़ियों ने मैदान से समाज को भी संदेश दिया कि मुश्किलें चाहे कितनी भी हों, हौसला हो तो रास्ता निकाला जा सकता है।

इन खिलाड़ियों के लिए व्हीलचेयर उनकी सीमा नहीं, बल्कि मैदान तक पहुंचने का साधन थी। उनके बल्ले से निकलते शॉट और गेंद के पीछे दौड़ती व्हीलचेयर यही बता रही थीं कि खेल के प्रति जुनून शरीर की सीमाओं का मोहताज नहीं होता। खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाने के लिए पंजाब के राज्यपाल व यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी मैदान में पहुंचे।