राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। एक ही साल में किसान पर मौसम की दोहरी मार पड़ी है। फरवरी में गर्मी पड़ने से जहां गेहूं का दाना सिकुड़ने से किसानों का बुरा हाल हुआ, वहीं सितंबर माह में पिछले चार दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण पक चुकी धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है।

अत्यधिक बारिश के कारण पानी बिछी हुई फसल के ऊपर से निकल रहा है। जिस फसल के ऊपर से पानी निकल गया, वहां से किसानों को कुछ भी नहीं मिलने वाला। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल का कहना है, यह बहुत संकट का समय है। किसान पर दोहरी नहीं तिहरी मार पड़ी है।

राजेवाल ने कहा कि गेहूं के बाद धान और इससे पहले लंपी स्किन की वजह से किसान के पशु भी मरे हैं। सितंबर के अंत में अत्यधिक बारिश ने पंजाब सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है, क्योंकि बारिश के कारण पूरा सर्कल ही बिगड़ने वाला है। पहले जहां 1 अक्टूबर से धान की कटाई शुरू हो जाती थी, बारिश के कारण अब यह 8 से 10 दिन देर से शुरू होगी।

धान की खरीद हमेशा ही सरकार के लिए बड़ी चुनौती वाला रहता है, क्योंकि धान की कटाई के तुरंत बाद गेहूं की बिजाई का सीजन आ जाता है। ऐसे में किसान की कोशिश होती है कि वह जल्द से जल्द अपनी फसल बेचकर गेहूं की बिजाई करे।

वहीं, नियम के अनुसार 17 फीसदी से ज्यादा नमी वाले धान की एजेंसियां खरीद नहीं करती है। चार दिन से हो रही बारिश के कारण फसल में नमी की मात्रा का बढ़ना तय है, जो आने वाले समय में सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर देगा।

फतेहगढ़ साहिब के गांव डढ़ियाना के किसान अवतार सिंह का कहना है, फसल तैयार थी। कंबाईन की भी बुकिंग कर ली थी, लेकिन बारिश ने सबकुछ बिगाड़ कर रख दिया। कब मौसम खुलेगा, कब कटाई होगी, कब फसल सूखेगी सोच-सोच कर रूह कांप रही है।

राजेवाल का कहना है, सरकार ने अभी तक विशेष गिरदावरी के भी निर्देश नहीं दिए हैं। बारिश के कारण खड़ी फसल खेतों में बिछी हुई है। किसान के आंसू निकल रहे हैं और सरकार पता नहीं किस बात का इंतजार कर रही है। पंजाब सरकार से किसानों की उम्मीदें ही खत्म होती जा रही है।

पहले धान की सीधी बिजाई के लिए 1500 रुपये प्रति एकड़ देने की बात कही, लेकिन दिया अभी तक कुछ भी नहीं है। फसल खराब हो रही है और सरकार ने अभी तक विशेष गिरदावरी के निर्देश नहीं दिए। राजेवाल का कहना है, बारिश से पूरा सर्कल ही बिगड़ने वाला है, क्योंकि अब फसल की कटाई में 8 से 10 दिन का अंतर आ जाएगा, जबकि गेहूं की बिजाई का अनुकूल मौसम 20 नवंबर तक होता है।

राजेवाल ने कहा कि अगर इस दौरान बिजाई नहीं हुई तो गेहूं की फसल पर असर पड़ेगा। कटाई में देरी होगी तो बिजाई पर भी इसका असर पड़ेगा। वहीं, बारिश की वजह से सरकार इस बात को लेकर भी चिंतित है कि इससे किसानों की पराली को आग लगाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जबकि सरकार का पूरा जोर इस बात पर लगा हुआ था कि इस बार पराली जलने की घटना में कमी लाई जाए, क्योंकि अगर पराली में आग लगती है तो इससे सरकार की छवि राष्ट्रीय स्तर पर खराब होगी।

Edited By: Kamlesh Bhatt

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