'दिल्ली क्यों जाना चाहिए?' पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद की खींचतान के बीच एक सवाल पर विजय इंदर सिंगला का बेबाक जवाब
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में आगे चल रहे पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला ने दिल्ली जाने की अटकलों ...और पढ़ें

विजय इंदर सिंगला।
HighLights
विजय इंदर सिंगला ने दिल्ली जाने की अटकलों को खारिज किया।
उनके संगरूर में पहले से कार्यक्रम तय हैं, वे वहीं व्यस्त हैं।
सिंगला को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। 'मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए?'- पंजाब कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन और संगठन में जारी खींचतान के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और पंजाब कांग्रेस चुनाव प्रबंधन व समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला का यह बेबाक बयान सामने आया है। बीती रात से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान पद के लिए चली आ रही खींचतान के बीच ये उनका पहला रिएक्शन है, जो सामने आया है।
राज्य इकाई की कमान संभालने की रेस में सबसे आगे चल रहे सिंगला ने दिल्ली जाने और पार्टी हाईकमान से मुलाकात करने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अध्यक्ष पद को लेकर जारी घमासान और दिल्ली दौरों से जुड़े सवालों पर विजय इंदर सिंगला ने साफ लहजे में कहा-
भाई, मुझे दिल्ली क्यों जाना चाहिए? मेरे संगरूर के गांवों में पहले से कार्यक्रम तय हैं और मैं उन्हीं में व्यस्त हूं। मैं दिल्ली तभी जाता हूं जब वहां कोई काम होता है या फिर हाईकमान की ओर से कोई बुलावा आता है। फिलहाल दिल्ली जाने का ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं है।
यह भी पढ़ें- पंजाब कांग्रेस में खत्म होगी कलह! लक्ष्य- चन्नी और वडिंग गुटों में संतुलन, क्या विजय इंदर सिंगला संभालेंगे कमान?
पंजाब कांग्रेस में सुगबुगाहट तेजह
विजय इंदर सिंगला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब कांग्रेस में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान वर्तमान अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह किसी नए चेहरे को कमान सौंपने पर विचार कर रहा है। इसके पीछे का मुख्य मकसद 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के धड़ों के बीच राजनीतिक संतुलन स्थापित करना है।
हाईकमान के फैसले का इंतजार जारी
हिंदू चेहरे और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले विजय इंदर सिंगला को इस अंदरूनी खींचतान के बीच एक सर्वमान्य और तटस्थ विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस बयान से साफ है कि वे फिलहाल अपनी जमीनी राजनीति और संगरूर क्षेत्र के दौरों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं तथा हाईकमान के औपचारिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
