चंडीगढ़, जेएनएन। लोन टेक केयर और नई मशीनरी खरीदने के बहाने बैंक को धोखा देने के मामले में दो आरोपितों ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। दोनों की पहचान इंडियन ओवरसीज बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक राजकुमार और जयपुर निवासी सेवानिवृत्त इंडियन ओवरसीज बैंक से मुख्य प्रबंधक सत्य कुमार पारीक के रूप में हुई है। सीबीआइ की स्पेशल अदालत ने दोनों की याचिकाओं पर सीबीआइ को 29 अक्टूबर को जवाब देने के लिए कहा है।

कहा : कोई अपराध नहीं किया

याचिका में कहा कि उनके द्वारा कोई अपराध नहीं किया गया है। उनके द्वारा केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जाते थे। ऑफिस कर्मचारियों द्वारा कागजात की जांच की जाती थी जिसके बाद वह हस्ताक्षर करते थे। इसलिए किसी भी अपराध के लिए आवेदक को आपराधिक साजिश का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। याचिकाकर्ता पारीक ने अपने आवेदन में उल्लेख किया कि उसने कभी कोई अपराध नहीं किया है। किसी भी व्यक्ति को कोई भी अवैध कार्य करने में मदद नहीं की है। इंडियन ओवरसीज बैंक के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक ने विभागीय जांच के बाद एफआइआर दर्ज करने की शिकायत दी है। जांच में अधिकारियों की ओर से कोई भी गड़बड़ी नहीं पाई गई थी।

एफआइआर में नामजद आरोपितों ने लोन टेकओवर मामले में और नई मशीनरी खरीदने के बहाने बैंक को धोखा दिया था। सीबीआइ ने अपनी जांच पूरी करने के बाद याचिकाकर्ता और अन्य आरोपितों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा-173 के तहत चार्जशीट अदालत में दायर की थी। उन्हें अदालत ने आरोपित के रूप में तलब किया था। एफआइआर के बाद सीबीआइ ने कभी भी उन्हें गिरफ्तार करने की आवश्यकता महसूस नहीं की गई।

हालांकि याचिकाकर्ता जांच में शामिल हो गए और सीबीआइ के साथ सहयोग किया, इस मामले में याचिकाकर्ता ही गवाह हैं। लेकिन उनको आरोपित बनाने के पीछे ऐसा लगता है कि मामले में वास्तविक अपराधियों को बचाने के लिए उन्हें बली का बकरा बनाया गया है। मामले में उन्हें कभी हिरासत में नही लिया गया।

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