चंडीगढ़, [वीणा तिवारी]। चंडीगढ़ की कुल आबादी में से 13 प्रतिशत लोग किसी न किसी मानसिक विकार से ग्रस्त हैं। इसमें सामान्य मानसिक विकारों में डिप्रेशन, टेंशन, शराब या अन्य प्रकार के नशे की लत शामिल है। प्रभावित आबादी में से 80 प्रतिशत लोग इसका इलाज नहीं करा रहे हैं। यह गंभीर स्थिति है। यह बातें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के प्रिंसिपल डायरेक्टर प्रो. बीएस चवन ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आयोजित दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में कहीं।

डब्लयूएपीआर (चंडीगढ़ चैप्टर) के अध्यक्ष सी रामासुब्रमण्यम ने पुनर्वास के विभिन्न मॉडलों में सूचना प्रौद्योगिकी और टेलीमेडिसिन के योगदान की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस व्याख्यान का आयोजन वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफसाइकॉलजी रिहेबिटेशन की से किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन पंजाब, हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र चौहान ने किया। इस अवसर पर प्रो. चवन उक्त एसोसियेशन के अध्यक्ष डॉ. सी रामसुब्रमण्यम, उपाध्यक्ष डॉ. मैथ्यू वरगीज़ और सम्मेलन के संयोजन सचिव डॉ. नितिन गुप्ता उपस्थित थे। वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ साइकोलॉजी रिहेबिलिटेशन इंडियन चैप्टर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पंजाब, हरियाणा हाइकोर्ट के जज जितेंद्र चौहान के साथ डॉ. सी रामसुब्रमण्यम, डॉ. मैथ्यू वरगीज और डॉ. नितिन गुप्ता उपस्थित रहे।

70 प्रतिशत गंभीर रूप से बीमार

प्रो. चवर ने बताया कि कुल बीमार लोगों में से लगभग 50-70 प्रतिशत को सामान्य या गंभीर परेशानी है। मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (2017) के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य देखभाल व पुर्नवास किसी भी व्यक्ति का अधिकार है और वह अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकता है। उन्होंने बताया कि संबंधित विभाग, स्वयंसेवी संस्था परिवर्तन के सहयोग से इन विकारों का उपचार हो रहा है। जो प्रभावित व्यक्ति बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं या शारीरिक अक्षमता के कारण अस्पताल नहीं आ सकते, बेघर हैं या घुमंतू हैं उनकी घर में देखभाल मुहैया करवाई जाती है।

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Posted By: Sat Paul

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