राजेश ढल्ल, चंडीगढ़

साल 2022 के नगर निगम के लिए हो रहे चुनाव में स्थानीय के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी प्रचार हो रहा है। साढ़े छह लाख मतदाता इन्हीं मुद्दों पर उम्मीदवारों से सवाल-जवाब कर रहे हैं। अगले कुछ दिनों में प्रत्येक दल अपना-अपना घोषणा पत्र जारी करेंगे। इन घोषणा पत्रों को भले ही सियासी दलों की ओर से अपना विजन डाक्यूटमेंट बताया जा रहा हो, लेकिन खास तौर से चुनाव में 22 ऐसे मुद्दे होंगे, जिनके आधार पर ही उम्मीदवारों की हार-जीत तय होगी। वैसे तो हर वार्ड की कुछ अलग समस्याएं हैं। बावजूद इसके 22 मुद्दे कामन हैं। यह अहम मुद्दे शहर के हर वर्ग से जुड़े हैं। चंडीगढ़ वासियों का मानना है कि इन मुद्दों का हल निकालने का प्रयास होना चाहिए। 24 दिसंबर को होने वाले मतदान से पहले दैनिक जागरण ने शहर के हर वर्ग के प्रतिष्ठित और बुद्धिजीवी लोगों से बातचीत की, जिसमें उन्होंने इन मुद्दों को चुनाव के लिए निर्णायक बताया..। मुद्दा-1

लाल डोरे से बाहर बने निर्माण को रेगुलर करना

इस समय सभी गांव नगर निगम में शामिल हैं। गांवों के लाल डोरे के बाहर बने निर्माण को रेगुलर करने का मुद्दा इस बार भी सामने है। पिछले चुनाव की तरह इस बार भी राजनीतिक दल इस बार भी गांव निवासियों से वायदा कर रहे हैं कि लाल डोरे के बाहर बने निर्माण को रेगुलर किया जाएगा। जबकि प्रशासन ने इन इमारतों को अवैध ही मानता है। शहर के सभी 22 गांवों नगर निगम में ही शामिल हो चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद लाल डोरे का कोई हल नहीं निकला है। मुद्दा-2

शहर को स्लम फ्री बनाना

शहर में 17 हजार फ्लैट पुनर्वास योजना के तहत बनाकर झुग्गी वालों को बांट दिए गए हैं। इसके बावजूद शहर को स्लम फ्री सिटी का स्टेट्स नहीं मिला है। चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा रहेगा जबकि अभी भी 5 हजार से ज्यादा झुग्गियां बच गई हैं। जिन्हें मकान की जरूरत है। चुनाव में राजनीतिक दल इन्हें भी मकान दिलवाने का वायदा करेंगे। धनास की कच्ची कॉलोनी और सेक्टर-25 में अभी भी झुग्गियां बनी हुई है। मुद्दा-3

शहर के युवाओं के लिए रोजगार

प्रशासन ने शहर के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी में आवेदन करने की आयु सीमा 25 से बढ़ाकर 35 साल करवा दी है, लेकिन शहर में सरकारी नौकरियों के ज्यादा अवसर नहीं है। ऐसे में शहर का युवा दूसरे राज्यों में या विदेशों में पलायन कर रहा है। बावजूद इसके शहर के हजारों युवा ऐसे हैं, जिनके पास डिग्रियां है लेकिन उन्हें मजबूरी में 10 से 20 हजार रुपये की नौकरियां करनी पड़ रही है। ऐसे में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना अहम मुद्दा रहेगा। चंडीगढ़ के युवा अब दूसरे राज्यों की तरह यूटी में भी डोमिसाइल को तवज्जो देने का मामला उठा रहे हैं। मुद्दा-4

स्वास्थ्य सेवाओं और डिस्पेंसरियों को अपग्रेड करना

शहर में सेक्टर-32 जीएमसीएच, सेक्टर-16 का अस्पताल और पीजीआइ तो है, लेकिन यह तीनों अस्पताल ओवरलोड हैं। ऐसे में शहर की स्वास्थ्य सेवाओं और रेजिडेंशियल एरिया में बनी डिस्पेंसरियों को अपग्रेड करना अहम मुद्दा है, क्योंकि लोग चाहते है कि उन्हें टेस्ट और विशेषज्ञ डाक्टर डिस्पेंसरियों में ही मिल जाए। सेक्टर-48 में 100 बेड का नया अस्पताल बन चुका है। शहर की डिस्पेंसरियों को 24 घंटे खुले रहने की मांग तेज हो गई है। मुद्दा-5

बूथों में अतिरिक्त मंजिल का निर्माण करने की मिले मंजूरी

शहर में व्यापारी वर्ग का काफी अच्छा वोट बैंक है और हर राजनीतिक दल अभी से व्यापारियों पर लुभाने का प्रयास कर रहा है। व्यापारियों के कई मुद्दे हैं, जिनका लंबे समय से हल नहीं निकल पा रहा है। ऐसे में इस चुनाव में भी शहर के बूथों में एक अतिरिक्त मंजिल का निर्माण के अलावा जो वायलेशन होने पर 500 रुपये स्केयर फीट के हिसाब से जुर्माना लगाने के नोटिस भेजे जा रहे हैं, उन्हें खारिज करना अहम मुद्दा रहेगा। मुद्दा-6

पानी के बढ़े हुए रेट पर लगे रोक

इस समय पानी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। शहरवासी बढ़े हुए रेट पर स्थायी रोक की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने कोरोना के कारण अगले साल मार्च तक बढ़े हुए पानी के रेट पर रोक लगा दी है। इस समय पानी के बिल पर 30 फीसद सीवरेज सेस चार्ज किया जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने मेयर बनने पर हर घर को दिल्ली की तर्ज पर 20 हजार निश्शुल्क पानी देने की गारंटी दी हुई है। जबकि कांग्रेस पुराने रेट ही लागू करने का वायदा कर रहे हैं। भाजपा शहर में 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू करने का वायदा कर रही है। मुद्दा-7

मकानों का मालिकाना मिले, शत प्रतिशत एरिया कवर करने की मिले मंजूरी

इस समय हाउसिग बोर्ड के ईडब्ल्यूएस के अलावा पुनर्वास योजना के तहत अलाट होने वाले 62 हजार रेजिडेंट्स परिवार अपने मकानों के मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं। ऐसे शहर में 25 हजार से ज्यादा मकान है। ऐसे में इतने बड़े वोट बैंक को रिझाने के लिए मालिकाना हक दिलवाने की मांग हर दल अपने घोषणा पत्र में शामिल करने जा रहा है। इसके अलावा हाउसिग बोर्ड में रहने वाले लोग शत प्रतिशत एरिया कवर करने के निर्माण को रेगुलर करने की मांग कर रहा है, लेकिन सीएचबी सिर्फ 60 से 70 प्रतिशत एरिया को कवर करने की ही मंजूरी देता है। मुद्दा-8

पब्लिक टायलेट्स की हालत सुधरे

इस समय शहर में 300 पब्लिक टायलेट्स हैं, जिनकी हालत खस्ता है। पिछले तीन साल से इनका रखरखाव करने वाला कोई नहीं है। सदन की बैठकों में कई बार मामला गरमाया लेकिन कोई हल नहीं निकला। ऐसे में चुनाव में यह भी एक बड़ा मुद्दा रहेगा। इस समय रात के समय शहर के टायलेट्स के दरवाजे लोगों के लिए बंद रहते हैं। मुद्दा-9

बिना टैक्स लगाए शहर का विकास करना

इस समय नगर निगम में वित्तीय संकट गरमाया हुआ है। नगर निगम की एफडी पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। ऐसे में शहरवासियों पर नए टैक्स लगाए बिना शहर का विकास नहीं हो सकता। ऐसे में हर राजनीतिक दल टैक्स लगाए बिना केंद्र सरकार से चंडीगढ़ के लिए ज्यादा से ज्यादा फंड लाने का वायदा लोगों से करेगा। फंड की भारी कमी होने के कारण कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पा रहा है। मुद्दा-10

पार्किंग व्यवस्था को दुरस्त करना

इस समय शहर का हर रेजिडेंश्यल और कामर्शियल एरिया में पार्किंग की काफी किल्लत है। जो शहर में 80 पेड पार्किंग चल भी रही थी उनमे स्मार्ट फीचर गायब हो चुके हैं। ऐसे में शहरवासियों पर बोझ डाले बिना मार्केट्स की पार्किंगों को चलाना एक अहम मुद्दा है। जबकि रेजिडेंश्यल एरिया में कम्युनिटी पार्किंग स्थल बनाने का भी प्लान राजनीतिक दल लोग शहरवासियों को बताएंगे। शहर के प्रमुख बाजारों में मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की मांग है। मुद्दा-11

स्वच्छता रैंकिंग सुधरे : शहर की सफाई व्यवस्था को दुरस्त करना

चुनाव से एक दम पहले स्वच्छ सर्वेक्षण की रैकिग बुरी तरह से गिरी है। चंडीगढ़ की रैकिग 66 वें नंबर पर आई है। इससे चंडीगढ़ की काफी किरकिरी हो रही है। पर्यटन कम हो रहा है। ऐसे में रैकिग को सुधारना एक बड़ी चुनौती है। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरस्त कर अगले सर्वेक्षण में रैकिग सुधारना भी मुद्दा चुनाव में बन गया है। मुद्दा -12

वेंडर्स को दी जाए राहत

इस समय शहर के वेंडर्स को बाजारों से हटाकर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। इस कारण कई वेंडर्स का धंधा चौपट हो गया है। वेंडर्स से लाइसेंस फीस के साथ साथ अवैध मंथली भी वसूल की जाती है। कोरोना में कई वेंडर्स अपनी लाइसेंस फीस जमा नहीं करवा पाए। ऐसे में वेंडर्स अपनी पुरानी जगह पर ही शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं। वेंडर्स का शहर में अच्छा खासा वोट बैंक है। मुद्दा-13

हाउसिग इंप्लाइज स्कीम के तहत सस्ते रेट पर फ्लैट दिलवाना

इस समय शहर के 3950 कर्मचारियों का परिवार पिछले 13 साल से अपनी हाउसिग स्कीम के तहत फ्लैट का इंतजार कर रहा है। केंद्र सरकार ने जमीन का स्टेट्स क्लीयर कर दिया है, लेकिन जमीन काफी महंगी होने के कारण फ्लैट्स के रेट्स तीन से पांच गुना महंगे तय हो रहे हैं। ऐसे में इन कर्मचारियों को सस्ते रेट पर फ्लैट्स उपलब्ध करवाना मुद्दा बन गया है और कोई भी दल इन कर्मचारी परिवारों को नाराज नहीं करना चाहता है। नगर निगम चुनाव को लेकर हाउसिंग इंप्लाइज वेलफेयर सोसाइटी सक्रिय हो गया है।

मुद्दा-14

डंपिग ग्राउंड से शहर को मुक्ति दिलवाना

इस समय शहर का एक मात्र डंपिग ग्राउंड में कचरे का पहाड़ बन गया है। गारबेज प्लांट शहर का प्रतिदिन निकलने वाले सभी 500 टन कचरे को प्रोसेस नहीं कर पा रहा है। ऐसे में शहर के सारे कचरे को प्रोसेस करने और डंपिग ग्राउंड से मुक्ति दिलवाना चुनावी मुद्दा बन गया है। मानसून के दिनों में डपिग ग्राउंड से पूरे शहर में दुर्गंध आती है। डंपिग ग्राउंड के कारण डडूमाजरा के निवासी बीमार हो रहे हैं। डंपिग ग्राउंड में 34 करोड़ की लागत से कचरे को प्रोसेस करने का काम चल रहा है , लेकिन इसकी गति काफी धीमी है। मुद्दा-15

ट्रासपोर्ट व्यवस्था को दुरस्त करना

इस समय शहर में 11 लाख से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड है। शहर की हर प्रमुख सड़क पर सुबह और शाम जाम लगता है। प्रशासन का हर प्लान फेल हो चुका है। ऐसे मे चंडीगढ़ में मेट्रों, मोनो रेल और जाम से निजात दिलवाने का मुद्दा रहेगा। जबकि सांसद शहर में मेट्रों के समर्थन में नहीं है। जबकि कांग्रेस अभी से वायदा कर रही है कि वह जीतते है तो शहर में मेट्रों शुरू करवाएंगे। मुद्दा-16

प्रशासन की नीतियों में रेजिडेंट्स की भागीदारी बढ़ाना

इस समय हरियाणा और पंजाब से अधिकारी तीन साल के कार्यकाल के लिए आते हैं और नीतियां शहर के लिए बनाकर थोप जाते हैं। यहां के स्थानीय रेजिडेंट्स से कोई राय नहीं ली जाती है। ऐसे में शहर की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन चाहती है कि उनकी भागीदारी प्रशासन की नीतियों को बनाते समय रखी जाए। ऐसे में इस बार यह चुनाव का एक अहम मुद्दा बन गया है। मुद्दा-17

कालोनियों और गांव में सुविधाएं बढ़ाना

शहर का 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता कालोनियों और गांव में ही रहता है। इसलिए हर दल का इन पर विशेष फोकस है।ऐसे में इन्हें शहर के बराबर लाकर विकास करवाना चुनावी मुद्दा रहेगा। मनीमाजरा और मौलीजागरां के निवासी अपने एरिया के लिए विशेष पैकेज की मांग कर रहे हैं। डेढ़ लाख से ज्यादा मतदाता मनीमाजरा, मौलीजागरा और इंदिरा कालोनी में रहते हैं। मुद्दा-18

दक्षिणी सेक्टरों पर विशेष ध्यान

दक्षिणी सेक्टरों में शहर की काफी जनसंख्या रहती है।तीसरे फेज में अधिकतर हाउसिग सोसाइटियां है।इन सोसाइटियों के लोग चाहते है कि उनके भीतर का विकास भी प्रशासन और नगर निगम करवाएं जबकि प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं है। ऐसे में यह चुनाव का एक बड़ा मुद्दा रहेगा इसके लिए दक्षिणी सेक्टरों के तीसरे में कई बाजार ऐसे हैं जहां पर एक भी बाजार नहीं है। यहां पर मार्केट्स बनवाना भी एक मुद्दा रहेगा। मुद्दा-19

बच्चों को मिले खेल का मैदान

सैर करने के लिए शहर में 1700 नेहबरहूड पार्क है, लेकिन बच्चो के खेलने के लिए मैदान नहीं है। इसको लेकर अभिभावक चितित है। चंडीगढ़ के लोग शहर में इंटरनेशनल स्टेडियम और फिल्म सिटी के निर्माण की मांग कर रहे हैं। शहर के रेजिडेंश्यल एरिया में बच्चों के लिए खेलने के मैदान सभी सुविधाओं के साथ बनाना अभिभावकों की बड़ी मांग रही है। नगर निगम पिछले साल 100 ऐसे स्थल तय किए हैं जिन्हें बच्चों के खेलने के लिए रिजर्व रखा गया है लेकिन यह बन नहीं पाए हैं। मुद्दा-20

बेसहारा मवेशियों से दिलवाई जाए निजात

शहवासियों पर काऊ सेस थोप दिया गया। जब काऊ सेस लगाया गया था तब नगर निगम की ओर से कहा गया था कि शहरवासियों को सड़कों पर घूमने वाले लावारिस पशुओं से निजात दिलवाई जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस समय दक्षिण सेक्टर के लोग सबसे ज्यादा लावारिस पशुओं से परेशान है। इस कारण सड़क हादसे भी हो चुके हैं। इस समय आवारा कुत्तों की भी दिक्कत शहर में बढ़ी हुई है। ऐसे में डॉग बाइट के मामले बढ़ गए हैं। मुद्दा-21

सुधरे सड़कों की हालत

इस समय शहर के सेक्टरों,गांव और कॉलोनियों के रिहायशी इलाकों की अंदरूनी सड़कों की काफी खस्ता हालत है। इस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव में एक मुद्दा बन गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे को काफी गरमा रहे हैं। इसके साथ ही कई जगह पर सड़क किनारे बने फुटपाथ और पेवर ब्लाक भी टूटे हुए हैं। मुद्दा-22

बची रहे शहर की हरियाली

चंडीगढ़ की पहचान पूरे देश में हरियाली के कारण है, लेकिन शहर के पेड़ की जड़े रखरखाव न होने के कारण कमजोर हो गई है। इसी कारण हर बार बारिश और तेज हवाएं चलने के कारण 10 से 12 पेड़ गिर जाते हैं। शहर में हरियाली को बढ़ाने के लिए कोई सफल प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इस बार चुनाव में शहर की हरियाली को बचाने के लिए एक नया पर्यावरण ग्रुप भी अपने उम्मीदवार खड़े करके चुनाव लड़ रहा है।

शहर से जुड़े मुद्दे सिर्फ चुनाव के दौरान ही राजनीतिक दलों को याद करवाए जाते हैं। घोषणा पत्र तक ही समस्याएं और मुद्दे सीमित रह जाते हैं। जबकि राजनीतिक दलों को घोषणा पत्र में समस्याओं को हल करने की समय सीमा भी बतानी चाहिए यह भी बताना चाहिए कि पिछले घोषणा पत्र में किए गए दावों में क्या क्या काम किए गए हैं। प्रशासन और नगर निगम को चाहिए की जो भी नीतियां बने उसमे रेजिडेंट्स की भागीदारी बढ़ानी चाहिए।

- बलजिदर सिंह बिट्टू, अध्यक्ष, फासवेक

Edited By: Jagran