मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

चंडीगढ़, जेएनएन। किसी के घर में बच्चा नहीं होता है तो वह छिंज मेले के आयोजन की मन्नत करता है। कई गांव ऐसे हैं जो अच्छी फसल और बारिश के लिए हर साल लाखों रुपये में छिंज मेले आयोजित करवाते हैं। देश में हर साल करोड़ों रुपये के छिंज मेले आयोजित होते हैं, बावजूद इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में हमारे पहलवान उम्मीद के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। यह सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि हम शुरू से इंटरनेशनल रूल्स के मुताबिक कुश्ती नहीं करते हैं। यह कहना है महाराजा रणजीत सिंह, अर्जुन अवॉर्डी और पद्मश्री करतार सिंह का। करतार सिंह बताते हैं कि अगर यह छिंज मेले इंटरनेशनल रूल्स के मुताबिक हों तो यकीनन भारतीय कुश्ती सफलता के नए आयाम स्थापित करेगी।

पैसे की नहीं मेडल की अहमियत को जानें पहलवान
पूर्व ओलंपियन करतार सिंह ने बताया कि कई अच्छे पहलवान राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बजाय छिंज और कुश्ती मेलों में हिस्सा लेने को तरजीह देते हैं। इन कुश्ती मेलों से यह पहलवान हर साल लाखों रुपये बना लेते हैं, उन्हें समझना होगा कि रुपये तो कुछ साल में खत्म हो जाएंगे लेकिन अगर वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में मेडल जीतते हैं तो वह इतिहास बन जाता है, जिससे उनका नाम हमेशा के लिए याद रखा जाता है।

पंजाब इसलिए पिछड़ गया खेलों में
पद्मश्री करतार सिंह मौजूदा समय में पंजाब रेसलिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी हैं। वे बताते हैं कि पंजाब खेलों में पिछड़ा नहीं है बल्कि हरियाणा ने बेहतर प्रयास किए जिस वजह से हरियाणा के खिलाड़ी इंटरनेशनल स्तर पर काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब ने पहले आतंकवाद का दंश झेला, उससे राज्य अभी उभरा भी नहीं था कि नशे की चपेट में आ गया। इसके अलावा युवाओं में अब पुलिस और फौज में जाने का शौक नहीं रहा। वे विदेश में जाने को तरजीह देते हैं। यह सब प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह हम खेलों में पिछड़ते गए।

जमीन स्तर पर काम करके बढ़ाया जा सकता है खेलों का स्तर
पंजाब में खेलों के स्तर को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को जमीन स्तर पर काम करना होगा। सबसे पहले हमें स्कूलों में खाली पड़े पीटीआइ और डीपीआइ के पदों को भरना होगा। खिलाड़ियों को बेहतर नौकरियां देनी होंगी, नई स्पो‌र्ट्स पॉलिसी बनाने से लेकर खेल से जुड़ी हर बात में पूर्व व सीनियर खिलाड़ियों की राय लेनी होगी। परिजन भी अपने बच्चों को खेलों से जोड़ें जिससे उनके बच्चे नशे से दूर रह सकें। सरकारें खेलों का बजट बढ़ाएं तो अच्छे नतीजे सामने आएंगे।

अखाड़ों से मिलकर कर रहे हैं खेल सुधारने के लिए प्रयास
करतार सिंह ने बताया कि राज्य में कुश्ती का स्तर बढ़े, इसके लिए हम अलग-अलग शहरों में चल रहे कुश्ती अखाड़ों से मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास यही है कि हम सरकार से एक ऐसा प्रस्ताव पास करवाएं जिसके मुताबिक उन्हीं अखाड़ों और छिंज मेलों को सरकारी मदद दी जाए जोकि इंटरनेशनल रूल्स के मुताबिक कुश्ती करवाते हैं।

खुद पूर्व ओलंपियन हैं करतार सिंह
पूर्व आइपीएस अधिकारी करतार सिंह बताते हैं कि वे खुद कुश्ती से बेहद प्यार करते हैं। उन्होंने वर्षों से खुद इंटरनेशनल स्तर पर कुश्ती प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। 1978 में बैंकाक एशियन गेम्स में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता, साल 1982 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता और सियोल एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है। साल 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रांज मेडल और साल 1982 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। तीन बार ओलंपिक गेम्स में भारतीय कुश्ती टीम के हिस्सा रहे। इतना ही 25 बार के व‌र्ल्ड वेटर्न रेसलिंग चैंपियनशिप के विजेता रहे हैं। 2008 बीजिंग ओलंपिक गेम्स में बतौर मैनेजर भारतीय टीम के साथ गए, इसी ओलंपिक में सुशील कुमार ने ब्रांज मेडल जीता था। करतार सिंह ने बताया कि उनका पूरा जीवन अखाड़े में बीता है। इंटरनेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं देश कुश्ती में और मेडल जीते, इसके लिए वे हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं, आने वाले कुछ सालों के बाद इसके शानदार नतीजे भी देखने को मिलेंगे।
 

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 

 

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!