चंडीगढ़ में कौमी इंसाफ मोर्चा का हिंसक प्रदर्शन, पुलिस पर किया हमला; हिरासत में कई प्रदर्शनकारी
कौमी इंसाफ मोर्चा के बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर चंडीगढ़ कूच के दौरान मोहाली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
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चंडीगढ़ में कौमी इंसाफ मोर्चा का हिंसक प्रदर्शन। फोटो जागरण
HighLights
कौमी इंसाफ मोर्चा का चंडीगढ़ कूच, पुलिस से झड़प।
प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन, आंसू गैस का इस्तेमाल।
कई पुलिसकर्मी घायल, प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। बंदी सिखों की रिहाई समेत अन्य मांगों को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा के चंडीगढ़ कूच के एलान के बाद शनिवार को मोहाली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। वाईपीएस चौक के पास प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने पर पुलिस ने पहले बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें रोकने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने दो लेयर की बेरिकेडिंग तोड़ दी।
चंडीगढ़ एसएसपी कंवरदीप कौर ने कहा कि प्रदर्शनकारी जब आगे बढ़ते रहे तो हमने हल्के बल का प्रयोग किया, जिससे किसी को गंभीर चोट न लगे। हमने उनको रोकने की कोशिश की। कई प्रदर्शनकारियों को हमने हिरासत में लिया है। झड़प में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, उनका मेडिकल कराया जा रहा है।
प्रदर्शन के लिए दो हफ्ते से चल रही थी बात
चंडीगढ़ एसएसपी ने कहा कि कौमी इंसाफ मोर्चा से दो हफ्ते से बातचीत चल रही थी। उन्होंने कहा था कि पंजाब लोकभवन की तरफ मार्च करेंगे। हमने उनसे अपील की थी कि पंजाब लोकभवन की बजाय कोई और जगह देखकर चंडीगढ़ में प्रदर्शन करना चाह रहे हैं तो हम वो जगह अलॉट कर सकते हैं। उन्होंने लोगों ने प्रदर्शन के लिए परमिशन भी नहीं लिया।
29 जुलाई की घटना के बाद पहले से थी तैयारी
29 जुलाई को चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर वारिस पंजाब दे और अकाली दल पुनर्सुरजीत के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड टूटने और वाटर कैनन वाहन पर प्रदर्शनकारियों के चढ़ने की घटना हुई थी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद 15 अगस्त के कूच को लेकर पुलिस ने पहले से ही मोहाली-चंडीगढ़ सीमा और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा कड़ी कर दी थी।
गवर्नर हाउस तक कूच का एलान
कौमी इंसाफ मोर्चा के कन्वीनर बापू गुरचरण सिंह ने बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर मोहाली से चंडीगढ़ स्थित गवर्नर हाउस तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले कई किसान संगठन भी इसमें शामिल हुए। पुलिस की ओर से प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग किए जाने से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई।
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