पूर्वोत्तर में उग्रवादियों के छक्के छुड़ाने वाले जांबाज को देश का सलाम, मोहाली के मेजर अरशदीप सिंह गिल को मिला 'कीर्ति चक्र'
मोहाली निवासी मेजर अरशदीप सिंह गिल को पूर्वोत्तर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में असाधारण वीरता के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित ...और पढ़ें

मोहाली के अधिकारी मेजर अरशदीप सिंह गिल को कीर्ति चक्र (फोटो: जागरण)

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जागरण संवाददाता, मोहाली।मोहाली के निवासी मेजर अरशदीप सिंह गिल को पूर्वोत्तर में आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान असाधारण वीरता का प्रदर्शन करने के लिए गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है।
वर्तमान में असम राइफल्स की पहली बटालियन में तैनात मेजर गिल मई 2025 में भारत–म्यांमार सीमा पर एक विशेष गश्ती दल का नेतृत्व कर रहे थे। यह दल सीमा पर बाड़ निर्माण में लगे श्रमिकों की सुरक्षा के लिए तैनात था, तभी ऊंचाई पर मौजूद उग्रवादियों ने अचानक और भीषण गोलीबारी शुरू कर दी।
असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए मेजर गिल ने तुरंत काउंटर-एम्बुश ऑपरेशन को अंजाम दिया और घनी झाड़ियों के बीच से आगे बढ़ते हुए दुश्मन के ठिकाने पर हमला किया। भारी दुश्मन फायरिंग के बावजूद उन्होंने आरपीजी लॉन्चर से लैस एक उग्रवादी सहित कई सशस्त्र उग्रवादियों को निष्क्रिय किया। उनके उत्कृष्ट नेतृत्व, वीरता और दृढ़ संकल्प के चलते अपने दल के किसी भी जवान को कोई क्षति नहीं हुई।
कीर्ति चक्र भारत का दूसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। इस वर्ष यह सम्मान केवल दो सैन्य कर्मियों को प्रदान किया गया है। दूसरे सम्मानित जवान नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा, द्वितीय बटालियन, द पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) से हैं।
प्रथम पीढ़ी के सैन्य अधिकारी मेजर गिल को जून 2016 में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) से प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार 2006 से 2010 के बीच राष्ट्रीय खेलों में पंजाब का प्रतिनिधित्व हॉकी में भी कर चुके हैं।
इस सम्मान से मोहाली का नाम रोशन हुआ है और यह मेजर अरशदीप सिंह गिल की वीरता, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
