राजेश मलकानियां, पंचकूला

सिटी सेंटर सेक्टर-5 में बने शालीमार मॉल का प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस रद करने का मामला अब नगर निगम की बैठक में जोर-शोर से उठेगा। 30 जून को किसान भवन में होने वाली बैठक में शालीमार मॉल का लगभग 4 करोड़ 26 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने रद कर नया प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस जारी करने पर काफी गहमागहमी है। अब फैसला किया गया है कि नगर निगम की बैठक में निगम सदस्यों द्वारा एकमत से प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस को दोबारा से देने के बारे में चर्चा की जाए। यदि सभी सदस्यों की सहमति बनी, तो शालीमार मॉल प्रबंधकों की मुश्किलें फिर से बढ़ जाएंगी।

नगर निगम ने शालीमार मॉल प्रबंधकों को 4 करोड़ 26 लाख रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स का नोटिस थमाया गया था, जिसके बाद शालीमार प्रबंधकों ने नगर निगम आयुक्त और अंबाला डिविजनल कमिश्नर के पास अपील की थी, लेकिन कोई भी फैसला ना आने के बाद शालीमार प्रबंधक पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गए थे। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने शालीमार प्रबंधकों को एक करोड़ रुपये जमा करवाने की हिदायत देते हुए अंबाला डिविजनल कमिश्नर को प्रबंधकों की अपील पर फैसला करने के लिए कहा था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अंबाला डिविजनल कमिश्नर ने नगर निगम आयुक्त को स्पीकिग ऑर्डर पास करने के लिए कहा था। मामले में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने पुराना प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस रद कर दिया और जोनल टैक्सेशन ऑफिसर से नया प्रापर्टी टैक्स नोटिस बनाने के लिए कहा, जिसके बाद एरिया के हिसाब से प्रॉपर्टी टैक्स एक करोड़ रुपये से भी नीचे आ गया। शालीमार प्रबंधक 1 करोड़ रुपये नगर निगम में जमा करवा चुके थे। इन परिस्थितियों में नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स लेने की बजाय उल्टा शालीमार प्रबंधक समिति का देनदार हो गया। नगर निगम की बैठक में शालीमार प्रबंधन समिति पर प्रॉपर्टी टैक्स पर चर्चा होगी। सभी तथ्यों को अधिकारियों ने पार्षदों एवं मेयर के समक्ष रखा जाएगा। तथ्यों पर विचार करने के बाद प्रबल संभावना है कि दोबारा से शालीमार को प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस देने के बारे में फैसला किया जाएगा। खंडहर पड़ा है शालीमार मॉल

शालीमार मॉल कई वर्ष से बनकर खड़ा है, लेकिन विवादों में होने के चलते आज यह पूरी तरह नहीं चल पाया। शुरुआत में कुछ दुकानदार एवं सिनेमा हॉल चला था, लेकिन बाद में वह भी बंद हो गए। अलॉटीज ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में शिकायत दी थी। इसमें एचएसवीपी को शिकायत देकर कहा गया था कि मॉल अभी खाली है। साइट एचएसवीपी की है। इस मॉल में इन्वेस्टमेंट लोगों की ओर से की गई है। इसके चलते लोगों को कब्जा दिलवाया जाए। इस मामले में एचएसवीपी ऑफिस के एस्टेट ऑफिस ने लीगल विग से राय मांगी थी। इसके बाद कई साल से मामला अटका पड़ा है। अलॉटीज को अभी तक न तो उनके शोरूम का पजेशन मिला है और न ही रुपये मिले हैं।

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