डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़ : वर्षो से शहर के प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों में कांट्रेक्ट पर नियुक्त 300 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसरों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। कई असिस्टेंट प्रोफेसर तो पांच से 10 साल से कॉलेजों में पढ़ा रहे थे, लेकिन कोविड-19 के कारण कॉलेजों ने उनकी नियुक्ति के मामले को लटका दिया है। छंटनी तय है। सूत्रों के अनुसार कॉलेज प्रबंधन ने आर्थिक तंगी के कारण टीचिग स्टाफ में कटौती के मौखिक निर्देश दिए हैं। तीन अगस्त से पंजाब यूनिवर्सिटी द्वारा कॉलेजों में एकेडमिक सत्र का शेड्यूल जारी किया गया है। लेकिन कॉलेजों ने न तो इन प्रोफेसरों का कांट्रेक्ट आगे बढ़ाया और न ही इनकी चयन प्रक्रिया के लिए कोई शेड्यूल जारी किया है। गौरतलब है कि हर साल कांट्रेक्ट पर नियुक्ति के लिए जून में अधिकतर कॉलेज विज्ञापन जारी करते हैं और जुलाई में इंटरव्यू के बाद नियुक्ति पत्र जारी हो जाते थे। लेकिन इस बार कोई फैसला नहीं हुआ। कॉलेजों में आधी से अधिक कांट्रेक्ट फैकल्टी

यूजीसी नियमों के तहत रेगुलर असिस्टेंट प्रोफेसर को 60 से 70 हजार वेतन देना पड़ता है, जबकि प्राइवेट कॉलेजों में कांट्रेक्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों को 25,700 रुपये में नियुक्ति दी जाती है। जबकि कांट्रेक्ट और रेगुलर दोनों असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए शैक्षिक योग्यता एक जैसी है। मार्च-अप्रैल में कांट्रेक्ट शिक्षकों को रिलीव कर दिया जाता है और नए सत्र में फिर से नियुक्त किया जाता है। सरकारी कॉलेजों में भी कांट्रेक्ट, रिसोर्स पर्सन और गेस्ट फैकल्टी के तौर पर हर साल दो सौ के करीब शिक्षकों को नियुक्त किया जाता है। सेक्टर-26 स्थित श्री गुरु गोबिद सिंह कॉलेज (कोएड) में 70, श्री गुरु गोबिद सिंह कॉलेज फॉर वुमेन में 40, डीएवी कॉलेज-10 में 80, सेक्टर-36 एमसीएम डीएवी कॉलेज फॉर वुमेन में 70 और सरकारी कॉलेजों में 40 से अधिक कांट्रेक्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों की हर साल कांट्रेक्ट पर नियुक्ति होती है। कैट में 42 असिस्टेंट प्रोफेसर को मिली राहत

सरकारी कॉलेजों में कई तरह के कांट्रेक्ट असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की गई है। 2009 में नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने खाली पदों पर स्थायी नियुक्ति होने तक जारी रखने के निर्देश दिए थे। 2019 में भी छह सरकारी कॉलेजों में 42 असिस्टेंट प्रोफेसर को कांट्रेक्ट पर नियुक्त किया गया था, इन प्रोफेसर को अप्रैल में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा रिलीव कर दिया गया तो मामला कैट में पहुंचा। कैट ने नई भर्ती तक इन सभी असिस्टेंट प्रोफेसर को भी नहीं हटाने के निर्देश जारी कर दिए। लेकिन तीन सरकारी कॉलेजों में सितंबर 2019 में करीब 40 कांट्रेक्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की गई। इन शिक्षकों को नियुक्ति के छह महीने बाद वेतन जारी किया गया था।

Posted By: Jagran

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