चंडीगढ़ क्लब में अब न प्रशासन तोड़फोड़ करेगा, न कमांडो कैटरर कोई निर्माण करेगा, 22 साल पुराने अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
चंडीगढ़ क्लब में 22 साल पुराने अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए हैं। प्रशासन को तोड़फोड़ से रोक दिया गया है, वहीं कमांडो कैटरर को निर्माण करने से। कोर्ट ने कमर्शियल गतिविधियों पर भी रोक लगाई है। एस्टेट ऑफिस ने पहले ही अतिक्रमण हटा दिया था, लेकिन अब अपीलीय प्राधिकरण के आदेश तक कोई नया निर्माण नहीं होगा।

चंडीगढ़ क्लब के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश जारी किए।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। चंडीगढ़ क्लब में 22 साल पुराने अतिक्रमण को हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आगे कोई भी तोड़फोड़ करने से रोक दिया है।
दूसरी ओर यहां अवैध कब्जा करने वाले कमांडो कैटरर पर भी इस जगह अब कोई निर्माण करने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अब स्टेटस-को यानी यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश जारी कर दिए हैं।
इस फैसले से प्रशासन को कुछ खास असर नहीं हुआ क्योंकि एस्टेट आफिस ने 24 नवंबर को ही क्लब में फैले अतिक्रमण के पूरी तरह ढाह दिया था। अब यहां मलबा पड़ा हुआ है और इस जगह पर कमांडो कैटरर कोई कमर्शियल प्रोग्राम भी नहीं कर सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इसका भी जिक्र किया हुआ है। कमांडो कैटरर ने यहां बैंक्वेट हाल बना रखा था जहां वीआइपी लोगों के कार्यक्रम होते थे। चंडीगढ़ प्रशासन कई साल से इस अतिक्रमण को हटा नहीं पा रहा था, लेकिन 14 नवंबर को एस्टेट आफिस ने इस अतिक्रमण को हटाने के आदेश जारी कर दिए थे।
इस फैसले के खिलाफ कमांडो कैटरर ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जोकि खारिज हो गई थी। इससे पहले की कैटरर सुप्रीम कोर्ट जाता, प्रशासन ने पहले ही अतिक्रमण पर बुल्डोजर चला दिया।
सोमवार को कमांडो कैटरर की स्पेशल लीव पिटीशन(एसएलपी) पर सुनवाई हुई, जिसमें क्लब परिसर में किसी भी तरह की आगे की तोड़फोड़ पर रोक लगा दी गई और कैटरर को भी कोई अवैध निर्माण करने से रोक दिया।
सुबह छह बजे ही शुरू हो गई थी ड्राइव
यूटी एस्टेट ऑफिस ने 24 नवंबर को सेक्टर-1 स्थित चंडीगढ़ क्लब में अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी थी। यह अभियान सुबह छह बजे ही शुरू हो गया था। कई विभागों की टीमें यहां मौजूद थी।
प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई कैपिटल आफ पंजाब(डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 के तहत की गई थी। कैटरर के पास इस ड्राइव को रोकने के लिए कोई स्टे ऑर्डर भी नहीं था। इसलिए प्रशासन इस कार्रवाई को सफल बना सका।
अब अपीलीय प्राधिकरण के आदेश तक यथास्थिति
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब क्लब परिसर में आगे कोई निर्माण या तोड़फोड़ नहीं होगी। इस पूरे मसले पर अंतिम निर्णय अपीलीय प्राधिकरण द्वारा आगे दिए जाने वाले आदेशों पर निर्भर करेगा।

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