आनलाइन डेस्क, चंडीगढ़। ऊर्जा की उचित संभाल को उत्साहित करने और इमारतों में ऊर्जा कुशलता को दर्शाने के लिए भगवंत मान केनेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने मोहाली में सुपर एनर्जी कंजरवेशन बिल्डिंग कोड (ईसीबीसी) के अनुरूप इमारत बनाने का फैसला किया है। यह इमारत कम बिजली खपत करेगी और मानक सिद्ध होगी। 

पंजाब के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्री अमन अरोड़ा का कहना है कि इमारतों में ऊर्जा कुशलता को दर्शाने के लिए सेक्टर-65, मोहाली में सुपर ईसीबीसी इमारत के निर्माण के लिए आवास निर्माण और शहरी विकास विभाग की तरफ से पेडा को 1500 वर्ग मीटर जमीन अलाट की गई है।

इस इमारत को अगले 2 सालों के अंदर प्रयोग के लिए तैयार कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पैसिव डिजाइन विशेषताओं से लैस सुपर एफीशिएंट टेक्नोलाजी को प्रदर्शित करती उत्तरी भारत में अपनी किस्म की यह पहली इमारत माडल के तौर पर काम करेगी।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ए वेनू प्रसाद का कहना है कि ईसीबीसी अनुरूप इमारत तैयार करने में सभी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। यह इमारत राज्य में जागरूकता के लिए सभी हिस्सेदारों, विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए एक माडल बिल्डिंग के तौर पर काम करेगी। प्रस्तावित सुपर एनर्जी एफिशिएंट बिल्डिंग के डिजाइन और निर्माण का खर्च ब्यूरो आफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) की ओर से वहन किया जाएगा। 

पेडा के मुख्य कार्यकारी डा. सुमित जारंगल का कहना है कि पंजाब में ऊर्जा कुशलता के प्रदर्शन और अन्य सरकारी इमारतों में ऐसे अभ्यास को उत्साहित करने के लिए इस इमारत को एक आदर्श माडल के तौर पर पेश करने के लिए आवास निर्माण और शहरी विकास विभाग ने सार्वजनिक संस्थागत बुनियादी ढांचे के अधीन मोहाली में पंजाब मंडी भवन के नजदीक तकरीबन 1500 वर्ग मीटर जमीन अलाट की है। बता दें, बीईई के दिशानिर्देशों के अंतर्गत एनर्जी कंजरवेशन एक्ट-2001 को लागू करने और तालमेल के लिए पेडा पंजाब सरकार की एक एजेंसी है।

क्या है ईसीबीसी

इसका उद्देश्‍य अपार्टमेंट्स और टाउनशिप सहित घरों के निर्माण और डिजाइन को बढ़ावा देना है, ताकि इनमें रहने वाले लोगों को ऊर्जा दक्षता के लाभ प्राप्‍त हों। 2017 के दौरान भारत सरकार ने वाणिज्यिक भवनों के लिए ईसीबीसी–2017 के संस्‍करण की शुरुआत की थी।

ऐसे बचेगी ऊर्जा

भवन में लाइट, वाल मिरर, एयर कंडीशनिंग की गुणवत्ता और मात्रा के चयन से सूर्य की गर्मी को भवन के भीतर आने से रोका जा सकता है। इससे गर्मी व सर्दी में तापमान वातानुकूलित रहता है, जबकि पंखे, ट्यूबलाइट, एसी व अन्य बिजली उपकरण सौर ऊर्जा से चलाए जाएंगे। इससे बिजली पर निर्भरता कम हो जाएगी। 

Edited By: Kamlesh Bhatt

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