पंजाब में ड्रग इंस्पेक्टर की बहाली पर भड़के बीजेपी नेता सुनील जाखड़, अमित शाह को पत्र लिखकर NIA और ED जांच की उठाई मांग
पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर ड्रग इंस्पेक्टर सीसाम कुमार ...और पढ़ें

पंजाब पूर्व बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ (फाइल फोटो)
HighLights
जाखड़ ने अमित शाह को पत्र लिखा
ड्रग इंस्पेक्टर सीसाम कुमार की जांच की मांग
करोड़ों की संपत्ति, सरकारी संरक्षण का आरोप
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर ड्रग इंस्पेक्टर सीसाम कुमार के मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की है।
जाखड़ ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशा तस्करी से जुड़े इस मामले में करोड़ों रुपये की संपत्ति सामने आने के बावजूद आम आदमी पार्टी सरकार ने आरोपित को जमानत मिलने के बाद सेवा में बहाल कर दिया और विभाग के मुख्यालय में महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर दिया। उन्होंने मामले में सरकारी संरक्षण और मनी लांड्रिंग के पहलुओं की जांच कराने का अनुरोध किया है।
17 अक्टूबर 2026 को अमित शाह को लिखे पत्र में जाखड़ ने मानसा में नशे की बिक्री का विरोध करने पर एक युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस मामले में पंजाब सरकार के मुख्य सचिव से जवाब मांग चुका है। जाखड़ ने इसके साथ मानसा में तैनात रहे ड्रग इंस्पेक्टर सीसाम कुमार से जुड़े मामले को भी गंभीर बताते हुए केंद्रीय एजेंसियों की जांच की जरूरत जताई।
करोड़ों की संपत्ति का मिला था पता
जाखड़ ने पत्र में लिखा कि पंजाब पुलिस ने वर्ष 2024 में ड्रग इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया था। इस दौरान 24 बैंक खातों में 7.09 करोड़ रुपये, दो बैंक लाकर, 21.49 करोड़ रुपये नकद, 260 ग्राम सोना, विदेशी मुद्रा और 2.40 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति का पता चला था।
पत्र के अनुसार, पंजाब के पुलिस महानिदेशक ने कहा था कि ड्रग इंस्पेक्टर जेल में बंद नशा तस्करों से जुड़े गिरोह के सरगना के रूप में काम कर रहा था और नशे की बिक्री में मदद कर रहा था। जाखड़ ने इस मामले को जेलों से संचालित नशा तस्करी के नेटवर्क, सीमा पार नशा तस्करी से संबंधों और करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़ा बताया है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर संपत्ति मिलने के बाद मामला मनी लांड्रिंग की जांच के योग्य था। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने न तो एनआइए से जांच कराने की मांग की और न ही मामला ईडी को सौंपा।
किसके कहने पर दी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
जाखड़ ने पत्र में सवाल उठाया कि जमानत मिलने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर को सेवा में बहाल करने और विभाग के मुख्यालय में महत्वपूर्ण पद पर तैनात करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। उन्होंने गृह मंत्री से यह भी पता लगाने का अनुरोध किया कि नशा मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को महत्वपूर्ण पद पर किसके कहने पर तैनात किया गया।
जाखड़ ने कहा कि एनआइए और ईडी की जांच से गिरोह के पीछे शामिल लोगों की पहचान होनी चाहिए। साथ ही जेलों से संचालित नशे के कारोबार को कथित सरकारी संरक्षण मिलने और इससे जुड़े मनी लांड्रिंग के मामलों का भी पर्दाफाश किया जाना चाहिए।
उन्होंने पत्र में कहा कि पंजाब सरकार स्वयं मानती है कि दवाओं का दुरुपयोग राज्य में बड़ी समस्या है। जाखड़ ने पंजाब के नशे से प्रभावित लोगों की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने और केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने का अनुरोध किया है।
