जेएनएन, चंडीगढ़। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन का कहना है महिलाओं को कभी यह नहीं कहना चाहिए कि वो महज हाउस वाइफ हैं और कुछ नहीं करती। उनको खुद नहीं पता कि वो कितना काम करती हैं। पति या बेटा बीमार हो तो तुरंत दवाई का प्रबंध करती हैं। खुद दिक्कत हो तो किसी को महसूस तक नहीं होने देती। हमारी सोसायटी भी ऐसी है कि महिलाओं की स्वीकार्यता को लेकर पुरुष सहज नहीं हैं।

पीजीआइ में भारत विकास परिषद के कार्यक्रम में शिरकत करने आई सुमित्रा महाजन ने कहा कि महिला रथ की सारथी होती है और पुरुष इसमें आयुद्ध के साथ सवार है। पुरुष के बल और पराक्रम को सही दिशा में ले जाना ही स्त्री का काम है। वह अपना घर छोड़कर दूसरे घर आती है। हर मामले में एडजस्ट करती है।

सुमित्रा का कहना है कि महिला वास्तव में बेहतरीन प्रबंधक होती है। इस मौके पर सांसद किरण खेर ने भी महिलाओं की बराबरी और कमजोर बच्चों के लिए स्कूल खोलने की बात कहीं। कार्यक्रम में पीजीआइ डायरेक्टर प्रो. जगत राम, मेयर देवेश मोदगिल, बीजेपी अध्यक्ष संजय टंडन, अविनाश शर्मा, अजय दत्ता, विनित गर्ग, एचआर नारंग और टीआर वधवा भी मौजूद रहे।

असली दर्शन तो लाइन में लगकर होते हैं

सुमित्रा ने कहा कि वीआइपी होने के बाद मजबूरीवश कई बार वो हेलीकॉप्टर में सवार होकर मंदिर जाती हैं और बिना लाइन में लगे ही भगवान के दर्शन कर लेती हैं। असल में ये भगवान के दर्शन नहीं होते। असली दर्शन तो दो घंटे लाइन में खड़े होकर ही होते हैं, जहां इंसान लाइन में खड़े होकर एक-दूसरे के सुख-दुख की बात सुनते हैं। बोलीं, मंदिर में जाओ तो थोड़ी देर वहां बैठो।

बेटे के करियर की चर्चा में मां जरूर भाग ले

मां बेटे के लिए क्या नहीं करती। बेटा मां से खाने, किताब से लेकर हर चीज हक से मांगता है। फिर एक दिन बेटा बड़ा होता है। हमारी यहां ऐसी परिपाटी बनी है कि पिता ही बेटे के करियर में मुख्य भूमिका निभाएगा। मां को भी ये हक है। काम छोड़कर कम से कम बाप व बेटे की चर्चा का हिस्सा जरूर बने।

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Posted By: Kamlesh Bhatt