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रामसर दर्जे से चमकेगी सुखना लेक, रखरखाव होगा और बेहतर; चंडीगढ़ को मिलेगी ग्लोबल पहचान

Published: Fri, 16 Oct 2026 03:59 PM (IST)

सुखना लेक वेटलैंड को रामसर साइट का दर्जा मिलने से चंडीगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी। यह दर्जा प्रवासी पक्षियों के ...और पढ़ें

सुखना लेक के वेटलैंड क्षेत्र को रामसर साइट का दर्जा मिला।

सुखना लेक के वेटलैंड क्षेत्र को रामसर साइट का दर्जा मिला।

HighLights

  1. भारत की 103वीं रामसर साइट बना सुखना वेटलैंड।

  2. प्रवासी पक्षियों और प्रकृति पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।

  3. प्रशासन को तैयार करनी होगी ईको-टूरिज्म की योजना।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। सुखना लेक के वेटलैंड क्षेत्र को रामसर साइट का दर्जा मिलने से शहर की प्राकृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिली है।

इससे न केवल प्रवासी पक्षियों और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सुखना को प्रकृति पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। 

सुखना लेक अभी नौकायन, सुबह-शाम सैर और शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होने के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। रामसर साइट बनने के बाद इसकी पहचान केवल मनोरंजन स्थल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास के रूप में भी जाना जाएगा। इससे पक्षी प्रेमियों, प्रकृति फोटोग्राफरों, पर्यावरण विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की रुचि बढ़ने की संभावनाएं हैं।

सुखना वेटलैंड मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां कामन पोचार्ड और पैलस फिश ईगल जैसी पक्षी प्रजातियों के साथ ब्लैक पांड टर्टल जैसे जीवों का प्राकृतिक आवास भी है।

सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों को देखने के लिए निर्धारित क्षेत्र, जानकारी केंद्र, प्रशिक्षित गाइड और पक्षियों की प्रजातियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो प्रकृति पर्यटन को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा मिल सकता है।

पर्यटन बढ़ेगा, लेकिन संरक्षण पहली प्राथमिकता

रामसर दर्जा मिलने के बाद सुखना वेटलैंड के संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। झील में गाद जमा होना, जलग्रहण क्षेत्र से मिट्टी का बहाव और आक्रामक वनस्पतियों का फैलाव प्रमुख चुनौतियां हैं। ऐसे में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाते समय पक्षियों के प्राकृतिक आवास, जल गुणवत्ता और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान रखना होगा।

प्रशासन सुखना को राक गार्डन, कैपिटल काॅम्प्लेक्स और शहर की अन्य प्राकृतिक विरासत के साथ जोड़कर पर्यावरण अनुकूल पर्यटन गतिविधियों की योजना बना सकता है। इससे चंडीगढ़ की पर्यटन ब्रांडिंग को मजबूती मिल सकती है।

रामसर का दर्जा मिलने से अपने आप पर्यटकों की संख्या, पर्यटन आय या केंद्रीय वित्तीय सहायता में बढ़ोतरी की गारंटी नहीं है। इसका वास्तविक लाभ प्रशासन की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

रामसर साइट बनने के पांच फायदे

  • अंतरराष्ट्रीय पहचान: सुखना वेटलैंड को वैश्विक स्तर पर मान्यता।
  • प्रकृति पर्यटन: पक्षी दर्शन, फोटोग्राफी और पर्यावरण अध्ययन की संभावनाएं।
  • जैव विविधता: प्रवासी पक्षियों और अन्य जीवों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर जोर।
  • झील का बेहतर प्रबंधन: गाद, मिट्टी के कटाव और आक्रामक वनस्पतियों पर नियंत्रण की जरूरत।
  • पर्यटन ब्रांडिंग: चंडीगढ़ की प्राकृतिक विरासत को दूसरे पर्यटन स्थलों के साथ जोड़ने का अवसर।

भारत में 103 रामसर साइट

अब भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर अब 103 हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने वीरवार को बताया कि चंडीगढ़ की सुखना झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों या वेटलैंड की 'रामसर सूची' में शामिल कर लिया गया है। रामसर स्थल, रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियां होती हैं। यह पर्यावरण संधि 1971 में हुई थी।

इसका उद्देश्य दुनियाभर में आर्द्रभूमियों के नुकसान रोकना और शेष आर्द्रभूमियों का विवेकपूर्ण उपयोग एवं बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। किसी आर्द्रभूमि को रामसर स्थल घोषित करने पर देश उसके संरक्षण के लिए प्रबंधन व्यवस्था स्थापित करने और उसकी निगरानी करने की प्रतिबद्धता जताते हैं।