जेएनएन, चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल ने इस्तीफे की पेशकश की, जिसे कमेटी सदस्यों ने सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव सुखबीर के नेतृत्व में ही लड़ने का एेलान किया। इसके अलावा बैठक में पंथक एजेंडे व लोगों के मुद्दों पर कांग्रेस सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की गई। कमेटी सदस्यों ने कहा कि सुखबीर के नेतृत्व में अकाली दल ने लगातार दो बार पंजाब में सरकार बनाई और कई चुनाव जीते। जहां तक पंथक भूल को सुधारने की बात है, इसके लिए रणनीति बनाने की जरूरत है।

सुखबीर के नेतृत्व में ही 2019 का चुनाव लड़ेगा शिरोमणि अकाली दल

सूत्रों के अनुसार, कोर कमेटी के सदस्यों ने माझा के टकसाली नेताओं रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, डॉ. रत्न सिंह अजनाला, सेवा सिंह सेखवां और उनके बेटों की तरफ से मीडिया में दिए जा रहे तीखे बयानों पर भी गंभीरता से चर्चा की। ज्यादातर बादल समर्थक कोर कमेटी सदस्यों ने कहा कि जब 10 साल लगातार शिअद का राज रहा तो सभी खुश थे, लेकिन जब पार्टी हार गई तो सभी विरोधियों की बोली बोलने लग गए पड़े हैं। एक कमेटी मेंबर ने कहा कि ढाई साल बाद बोलने का क्या फायदा है। अगर बोलना ही था तो मौके पर ही अपने ओहदों से इस्तीफे दे कर सुझाव देते, तब क्यों इनका जमीर नहीं जागा।

बादल ने दी टकसाली नेताओं के खिलाफ चुप रहने की हिदायत

मीटिंग में शिअद के सरपरस्त और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कोर कमेटी सदस्यों को शाम करते टकसाली नेताओं के खिलाफ कुछ भी न बोलने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जो भड़ास निकाल रहे हैं, उन्हें बोलने दो। परिवार में दो बर्तन हों तो वो टकराते ही हैं।

चंदूमाजरा और काहलों सुखबीर के हक में डटे

बैठक में सुखबीर बादल के समर्थन में आनंदपुर साहिब से सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा और पूर्व विधानसभा के स्पीकर निर्मल सिंह काहलों खुलकर सामने आए। दाेनों नेताओं ने कहा कि उनको सुखबीर के पार्टी का नेतृत्व करने पर कोई एतराज नहीं है। माझा क्षेत्र के नेताओं की बगावत पर उन्होंने कहा, 'यदि किसी पार्टी नेता ने अपनी राय पेश की है, तो सुखबीर इसका स्वागत करेंगे। मौजूदा संकट को जल्द हल कर लिया जाएगा। पार्टी मजबूत हो को उभरेगी।'

चंदूमाजरा ने कहा कि वह संसद के शीतकालीन सत्र में एक पस्ताव पेश करेंगे। इसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों को नरसंहार घोषित करने की मांग की जाएगी। वहीं, निर्मल सिंह काहलों ने कहा कि हम सुखबीर बादल का नेतृत्व नीचे 2012 की विधानसभा चुनाव जीता है। उनको इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है।

अकाली शासन में टकसालियों ने उठाए फायदे: काहलों

काहलों ने टकसाली नेताओं पर चुटकी लेते हुए कहा कि 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने पर उन्होंने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था। सुखबीर की लीडरशिप पर सवाल उठाने वाले सेवा सिंह सेखवां, रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा और सुखदेव सिंह ढींडसा ने 2007 से 2107 तक अकाली शासन के दौरान बहुत फायदे उठाए हैं। अब जब पार्टी को उनकी जरूरत है, तो वह यह मुद्दे बना रहे हैं। यह शर्मनाक बात है।

नहीं बुलाए वरिष्ठ नेता

कोर कमेटी की मीटिंग में वरिष्ठ अकाली नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, डॉ. रत्न सिंह अजनाला, सेवा सिंह सेखवां, भाई मनजीत सिंह शामिल नहीं हुए। पता लगा है कि अकाली दल की तरफ से उनको मीटिंग में शामिल होने के लिए सूचना भी नहीं भेजी गई थी। एक कोर कमेटी समिति मेंबर ने कहा कि जब उक्त नेताओं ने कोर कमेटी से इस्तीफा ही दे दिया है तो उनके आने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

ये नेता हुए शामिल

पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल, पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष किरपाल सिंह बडूंगर, अवतार सिंह मक्कड़, तोता सिंह, बलविंदर सिंह भूंदड़, सिकंदर सिंह मलूका, चरनजीत सिंह अटवाल, शरनजीत सिंह ढिल्लों, जागीर कौर, गुलजार सिंह राणीके, बिक्रम सिंह मजीठिया समेत कई सदस्य शामिल हुए।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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